‘घर के भेदी’ ने खोली सलीम वास्तिक की पोल, 1995 की FIR से लेकर कोर्ट आदेश भी पुलिस तक पहुँचाया: जानें- सालों कैसे बचता रहा एक्स मुस्लिम

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लोनी में एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अपहरण, रंगदारी और हत्या जैसे संगीन आरोपों में नाम आने के बावजूद उसके आपराधिक इतिहास की समय रहते जाँच न होना, पुलिस की बड़ी चूक के रूप में देखा जा रहा है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, घर के ही एक भेदी ने दिल्ली की क्राइम ब्रांच से संपर्क किया और 1995 में हुई FIR, कड़कड़डूमा कोर्ट के आदेश सहित तमाम जानकारी सौंपी।

किराएदार सत्यापन में लापरवाही बनी बड़ी वजह

लोनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में बाहरी लोग किराये के मकानों में रहते हैं, लेकिन सत्यापन की प्रक्रिया अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती है। मकान मालिक बिना जाँच-पड़ताल के किराएदार रख लेते हैं, जिससे अपराधियों को छिपने का मौका मिल जाता है।

नसबंदी कॉलोनी, इंद्रापुरी, इकराम नगर, रूपनगर, ट्रॉनिका सिटी, पूजा कॉलोनी और DLF जैसे इलाकों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पुलिस समय-समय पर किराएदार सत्यापन अभियान चलाती, तो सलीम जैसे आरोपित पहले ही पकड़ में आ सकते थे। पहले भी लोनी से आतंकवादी और बांग्लादेशी घुसपैठियों के पकड़े जाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे इस इलाके की संवेदनशीलता साफ होती है।

हमले के बाद भी नहीं खंगाली गई पूरी कुंडली

सलीम वास्तिक वर्ष 2010 में लोनी आकर बस गया था और उसने नई पहचान के साथ कारोबार शुरू किया। महिलाओं के कपड़ों की दुकान और जैकेट के आयात-निर्यात के काम के साथ उसने ‘एक्स मुस्लिम’ पहचान बनाकर सोशल मीडिया और यूट्यूब पर सक्रियता बढ़ाई।

मजहबी कट्टरता और कुरीतियों के खिलाफ उसके वीडियो उसे चर्चा में लाते रहे। 27 फरवरी 2026 को उसके कार्यालय पर जीशान और गुलफाम नाम के हमलावरों ने चाकू से जानलेवा हमला किया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों को अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया और सलीम को सुरक्षा दी गई।

घर के अंदर से खुला राज, तब हुई गिरफ्तारी

मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब सलीम के ही करीबी व्यक्ति ने उसके आपराधिक इतिहास का खुलासा किया। इस व्यक्ति ने दिल्ली क्राइम ब्रांच को संपर्क कर 1995 की FIR, कोर्ट के आदेश और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए। साथ ही सलीम की लोकेशन और परिवार से जुड़ी जानकारी भी साझा की, जिससे पुलिस को कार्रवाई में मदद मिली।

बताया जा रहा है कि सलीम के विचारों और गतिविधियों को लेकर परिवार के भीतर असहजता बढ़ रही थी और बाहरी दबाव भी बन रहा था। इसी के चलते उसने ने यह कदम उठाया। सूचना के आधार पर पुलिस ने दबिश देकर सलीम को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया।