झारखंड मे चल रहे छात्र आंदोलन पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का रुख बदल गया है। पहले उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी निश्चित रूप से झारखंड जाएगी और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ खड़ी होगी। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी छात्रों की हर माँग का समर्थन करेगी। हालाँकि, अब अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि वे झारखंड नही जाना चाहते। अभिजीत दीपके का ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी से बदतमीजी का Video भी सामने आया।
इससे पहले दीपके ने कहा था, “हम उन्हें पूरा समर्थन देते हैं। हमारे प्रतिनिधिमंडल ने वहाँ का दौरा किया है और हमारे लोग वहाँ खाना बाँट रहे हैं। हम मजबूती से उनके साथ खड़े हैं और उनकी सभी माँगों का समर्थन करते हैं। मैं भी वहाँ जाने का इरादा रखता हूँ।” हालाँकि दीपके ने तबीयत का हवाला देते हुए बताया था कि वह तुरंत झारखंड जाने में असमर्थ हैं।
#BreakingNews | Abhijeet Dipke Flatly Refuses to Join Jharkhand Protest, Says He Won't Go
— Republic (@republic) August 7, 2026
Tune in to get the #latest update: https://t.co/ssBffcGIAT#CJP #CJPProtest #AbhijeetDipke #SouravDas #CockroachJantaParty #JharkhandProtest #Jharkhand #JPSC #JSSC #ChandigarhProtest… pic.twitter.com/eLvuNCFIvv
इसी बीच सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दीपके ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी से तीखी बहस और ऊँची आवाज में बात करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्हें पुलिसकर्मी से बदतमीजी करते और आक्रामक अंदाज में बहस करते हुए देखा जा सकता है।
CJP Founder Abhijeet Dipke loses cool at a cop, seen shouting at an on-duty cop—WATCH
— TIMES NOW (@TimesNow) August 7, 2026
Dipke: Stopped from meeting some guests@RuchaKanolkar15 shares more details with @Swatij14 pic.twitter.com/oUsZDNr18G
वहीं शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को आंदोलन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को राँची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों को संबोधित करने के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने उसे मंच से नीचे उतार दिया और उन पर स्याही फेंक दी।
बोरा पर JPSC, JSSC CGL और राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे अभ्यर्थियों के समर्थन में प्रदर्शन स्थल पर पहुँची थीं। हालाँकि उनकी मौजूदगी का प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने विरोध किया। आंदोलनकारी लगातार यह कहते रहे हैं कि उनका आंदोलन किसी भी राजनीतिक दल या बाहरी संगठन से पूरी तरह अलग रहेगा।

