प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम ने एबीपी न्यूज (ABP News) के यूट्यूब चैनल पर किए गए एक बड़े दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे फर्जी (Fake News) करार दिया है। दरअसल एबीपी न्यूज के यूट्यूब थंबनेल में यह दावा किया गया था कि दिल्ली में देर रात पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर अंधाधुंध फायरिंग की है। सरकारी फैक्ट-चेक एजेंसी ने साफ किया कि राजधानी में ऐसी कोई भी घटना नहीं हुई है।
पीआईबी फैक्ट चेक (PIB Fact Check) ने सोशल मीडिया पर इस भ्रामक खबर का सच सामने रखते हुए कहा कि आधी रात को दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने का दावा पूरी तरह आधारहीन और झूठा है। सरकार की ओर से जारी बयान में आम जनता से अपील की गई है कि वे इस तरह की फर्जी खबरों पर कतई भरोसा न करें और न ही इन्हें किसी अन्य व्यक्ति को फॉरवर्ड करें।
⚠️Fake news alert!
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 28, 2026
🚨An ABP News YouTube thumbnail is circulating online, claiming that students were fired upon in Delhi during the late-night hours. #PIBFactCheck:
❌This claim is #Fake.
✅ There has been no such incident in Delhi at midnight.
⚠️ Always rely only on… pic.twitter.com/8ZCmA68tSY
PIB ने जोर देकर कहा कि सरकारी या कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों की जानकारी पर ही भरोसा करें, ताकि ऑनलाइन अफवाहों पर रोक लगाई जा सके।
सरकार ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि अगर भारत सरकार से जुड़ी कोई भी संदिग्ध या भ्रामक सामग्री सामने आती है, तो उसे तुरंत पीआईबी फैक्ट चेक के आधिकारिक एक्स हैंडल (@PIBFactCheck) या ईमेल ([email protected]) पर रिपोर्ट करें। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने वाले लोगों को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील मामलों में बिना जाँचे-परखे किसी भी खबर को शेयर न करने की हिदायत दी गई है।
यह विवाद हाल ही में सीजेपी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों के बाद सामने आया है। 20 जुलाई को हुए इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव देखने को मिला था। हालाँकि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की माँग स्वीकार करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और दर्ज एफआईआर वापस लेने का फैसला कर लिया था, लेकिन पुलिस फायरिंग जैसे फर्जी दावों से क्षेत्र में दोबारा तनाव और भ्रम फैलने का भारी खतरा बन गया था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा, “प्रतिबंधित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए केवल आवश्यकतानुसार उचित बल का प्रयोग किया गया था। विरोध प्रदर्शन की अनुमति केवल जंतर-मंतर क्षेत्र के लिए दी गई थी, लेकिन जब संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया, तब पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा।”

