भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा को अपनी कई बड़ी चूकों पर सरकार और संसद के सामने सफाई देनी पड़ी।
कंपनी के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के जरिए भारत से माफी माँगते हुए स्वीकार किया कि प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक कंटेंट और कुछ परिचालन संबंधी गलतियाँ हुई हैं।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम से हट गया था, जिसके बाद सरकार और संसदीय समिति ने मेटा को कड़ी फटकार लगाई।
PM मोदी का वीडियो हटने पर बढ़ा विवाद, संसदीय समिति ने माँगा जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई 2026 को युवाओं को संबोधित करते हुए एक वर्टिकल वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया था। यह वीडियो ऑनलाइन सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पोस्ट किया गया था।
हालाँकि मेटा के स्वामित्व वाले फेसबुक और इंस्टाग्राम से यह वीडियो कुछ समय के लिए हट गया। बाद में कंपनी ने इसे दोबारा बहाल करते हुए कहा कि यह तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलती से हटाया गया था।
लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा की इस सफाई को अपर्याप्त बताया। इसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति, जिसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद निशिकांत दुबे कर रहे हैं, उन्होंने कंपनी से जवाब तलब किया।
समिति ने मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के भीतर माफी माँगने के लिए कहा और चेतावनी दी कि ऐसा नहीं करने पर मेटा को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (सेफ हार्बर) वापस लेने की सिफारिश की जा सकती है। ऐसा होने पर कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज होने और कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
मेटा ने स्वीकार की गलतियाँ, कंटेंट बूस्टिंग पर भी किया बड़ा कबूलनामा
मेटा की वैश्विक टीम ने बुधवार (5 अगस्त 2026) को नई दिल्ली में केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव, IT सचिव एस कृष्णन और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की।
करीब 45 मिनट चली बैठक में सरकार ने मेटा के सामने कई गंभीर मुद्दे उठाए, जिनमें प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया जाना, प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और डीपफेक कंटेंट का प्रसार प्रमुख रहे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेटा ने स्वीकार किया कि कुछ कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी मात्रा में पैसे खर्च किए गए थे। कंपनी के अधिकारियों ने इस पर खेद जताया और अपनी गलतियों के लिए माफी माँगी। मार्क जुकरबर्ग ने भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से भारत सरकार तक अपना माफीनामा पहुँचाया।
बैठक में मेटा को स्पष्ट रूप से बताया गया कि यदि कोई प्लेटफॉर्म यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किस उपयोगकर्ता तक पहुँचेगा, तो उसे केवल इंटरमीडियरी नहीं माना जा सकता। ऐसे में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा स्वतः लागू नहीं होगी।
CSAM और डीपफेक पर सरकार की सख्ती, बढ़ी मेटा की मुश्किलें
बैठक में सरकार ने मेटा से प्लेटफॉर्म पर मौजूद बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री और डीपफेक वीडियो पर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा।
संसदीय समिति ने भी ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की माँग की है। हालाँकि संसदीय समिति केवल सिफारिश कर सकती है, अंतिम निर्णय और कार्रवाई केंद्र सरकार के हाथ में होगी।
इस बीच मेटा की कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवालों के घेरे में है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया जाँच में ऐसे कई विज्ञापनों का उल्लेख किया गया था, जिनमें बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा दिया जा रहा था। इन मामलों ने मेटा की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
भारत मेटा के लिए दुनिया का सबसे बड़ा यूजर बाजार है, जहाँ करोड़ों लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं। ऐसे में सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि देश में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों और जवाबदेही के मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा।

