‘लड़की की ना का मतलब ना’: बॉम्बे हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल के बरी होने का फैसला पलटा, बलात्कार मामले के दोषी करार

‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न और बलात्कार मामले में निचली अदालत से उनके बरी होने के फैसले को रद्द करते हुए उन्हें दोषी करार दिया है।

जस्टिस डॉ नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने 62 वर्षीय तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f), 376(2)(k) (रेप) और धारा 354A, 354B (यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी पाया।

अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद तरुण तेजपाल ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए अदालत से नरमी बरतने की गुहार लगाई। तेजपाल ने कहा, “मेरी उम्र 62 साल है और मैं खुद को इस मामले का शिकार (पीड़ित) मानता हूँ। परिवार में मेरी पत्नी है। हम इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे, कृपया मुझ पर रहम किया जाए।”

दूसरी ओर, गोवा सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल की नरमी की याचिका का कड़ा विरोध किया। मेहता ने कहा, “पीड़िता अभियुक्त की बेटी की उम्र की थी। तेजपाल एक पिता समान पद पर थे और उन्हें ऐसा अपराध नहीं करना चाहिए था। अदालत को समाज में एक सख्त संदेश देना होगा कि जब कोई लड़की ‘ना’ कहती है, तो उसका मतलब ‘ना’ ही होता है।”

यह मामला 7 नवंबर 2013 का है, जब गोवा के ‘ग्रैंड हयात’ होटल में तहलका के एक कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल पर अपनी ही महिला सहयोगी के साथ लिफ्ट में जबरदस्ती करने और यौन हमला करने के आरोप लगे थे।

मई 2021 में गोवा की सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने अब सेशंस कोर्ट का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया है।