नौकरी छोड़ते ही 48 घंटे में हिसाब-किताब पूरा, ओवरटाइम का डबल पैसा और 50% बेसिक पे… योगी सरकार की नई मजदूरी संहिता में क्या-क्या बदला?

उत्तर प्रदेश के लाखों कामगारों और कर्मचारियों के लिए योगी सरकार ने मजदूरी से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता-2026 को मंजूरी दी गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद न्यूनतम मजदूरी, वेतन भुगतान, ओवरटाइम, वेतन पर्ची और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।

सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि पात्र श्रमिक को सरकार की ओर से तय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान नहीं किया जा सकेगा। अब न्यूनतम मजदूरी का दायरा केवल कुछ तय श्रेणियों के काम तक सीमित नहीं रहेगा। मजदूरी तय करते समय कर्मचारी के कौशल, उसके काम की प्रकृति और जिस क्षेत्र में वह काम करता है, इन बातों को ध्यान में रखा जाएगा।

वेतन में बेसिक पे का हिस्सा कम नहीं होगा

नई संहिता में कुल वेतन में कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मूल वेतन यानी बेसिक पे रखने का प्रावधान किया गया है। इसका सीधा असर कर्मचारियों को मिलने वाले सामाजिक सुरक्षा लाभों पर पड़ सकता है। बेसिक पे बढ़ने से पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसे लाभों की गणना में भी फायदा मिल सकता है।

इसके साथ ही कर्मचारी के वेतन से होने वाली वैधानिक कटौतियों की भी सीमा तय की गई है। ऐसी कटौतियाँ कुल मजदूरी के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेंगी।

नौकरी छोड़ी तो बकाया के लिए लंबा इंतजार नहीं

नई व्यवस्था का एक अहम प्रावधान नौकरी छोड़ने या सेवा समाप्त होने के बाद मिलने वाली रकम से जुड़ा है। कर्मचारी का जो भी बकाया वेतन या अन्य देय राशि होगी, उसका भुगतान दो दिन के भीतर करना जरूरी होगा। इससे नौकरी छोड़ने के बाद महीनों तक भुगतान का इंतजार करने वाले कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

वेतन भुगतान से पहले कर्मचारी को वेतन पर्ची देना भी अनिवार्य होगा। इससे कर्मचारी को यह साफ पता रहेगा कि उसे कितनी मजदूरी मिली और किस मद में कितनी कटौती की गई।

ओवरटाइम कराया तो दोगुना पैसा

अगर कर्मचारी से तय काम के घंटों से ज्यादा काम कराया जाता है तो उसके लिए सामान्य मजदूरी दर की दोगुनी दर से ओवरटाइम भुगतान करना होगा। यानी अतिरिक्त काम के बदले अतिरिक्त भुगतान का नियम और स्पष्ट हो जाएगा।

महिला और पुरुष कर्मचारियों के लिए भी समान काम पर समान वेतन का प्रावधान लागू रहेगा। किसी कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में उसका बकाया पैसा उसके नामित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को दिया जाएगा।

संविदा कर्मचारियों को भी मिलेगा फायदा

नई संहिता में संविदा श्रमिकों के लिए भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। उनकी मजदूरी और बोनस का भुगतान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की होगी। इससे ठेका व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मचारियों के भुगतान से जुड़े विवादों में राहत मिलने की उम्मीद है।

नई व्यवस्था सिर्फ कर्मचारियों के अधिकारों तक सीमित नहीं है। नियोक्ताओं के लिए भी श्रम कानूनों का पालन करने की प्रक्रिया आसान बनाने का प्रावधान है। रजिस्टर और दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक तरीके से रखे जा सकेंगे। ऑनलाइन विवरणी की व्यवस्था होगी और निरीक्षण प्रणाली को जोखिम के आधार पर चलाया जाएगा।

पहली बार होने वाले कुछ उल्लंघनों में उपशमन का प्रावधान भी रखा गया है। विवाद होने पर विभागीय अधिकारियों के सामने अपील की व्यवस्था होगी जिससे हर मामले में सीधे हाईकोर्ट जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

कुल मिलाकर, मजदूरी संहिता-2026 का मकसद वेतन से जुड़े नियमों को एक व्यवस्था में लाना और कर्मचारी को उसकी मजदूरी तथा सामाजिक सुरक्षा का अधिक स्पष्ट अधिकार देना है। इसके लागू होने के बाद कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों के लिए वेतन और श्रम नियमों से जुड़ी जिम्मेदारियां पहले से अधिक स्पष्ट हो जाएँगी।