Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयपाकिस्तान में बाढ़ राहत शिविरों से हिन्दुओं को निकाला: उधर बिना भेदभाव सैकड़ों पीड़ितों...

पाकिस्तान में बाढ़ राहत शिविरों से हिन्दुओं को निकाला: उधर बिना भेदभाव सैकड़ों पीड़ितों की मदद कर रहा बलूचिस्तान का मंदिर, अधिकतर मुस्लिम

“मंदिर में सौ से ज्यादा कमरे हैं। हर साल बलूचिस्तान और सिंध से बड़ी संख्या में लोग तीर्थयात्रा के लिए यहाँ आते हैं।"

पाकिस्तान में आई बाढ़ (Pakistan Floods) से वहाँ के लोगों का जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ पीड़ितों को काफी समस्याएँ हो रही हैं। मुल्क के लोग पानी, भोजन और आश्रय सहित बुनियादी संसाधनों के लिए तरस रहे हैं। इसी बीच खबर है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाढ़ में फँसे पाकिस्तानी हिंदुओं की दुर्दशा को कवर करने के आरोप में पुलिस ने नसरल्लाह गद्दानी नाम के एक पत्रकार को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान पुलिस ने 7 सितंबर, 2022 को पत्रकार नसरल्लाह गद्दानी को गिरफ्तार किया था। उसे पाकिस्तानी हिंदुओं की स्टोरी को कवर करने के लिए 5 दिन के रिमांड पर लिया गया था। पत्रकार ने सिंध के मीरपुर मथेलो में भागरी समुदाय से जुड़े पाकिस्तानी हिंदुओं की दिल दहला देने वाली स्टोरी को कवर किया था। पत्रकार ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने भागरी समुदाय के लोगों को हिंदू होने के कारण बाढ़ राहत शिविर से निकाल दिया था।

सिंध में बाढ़ में फँसे भागरी समुदाय के लोगों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में हिंदू भागरी समुदाय के लोग अपनी भयावह स्थिति और स्थानीय प्रशासन के प्रति अपने व्यवहार को बताते हुए नजर आ रहे हैं। हिंदुओं ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने उन्हें यह कहते हुए बाढ़ राहत शिविरों से निकाल दिया था कि वे बाढ़ पीड़ित नहीं हैं।

गौरतलब है कि इस बड़ी आपदा में बलूचिस्तान के कच्छी जिले का एक मंदिर अँधेरे में रोशनी बनकर सामने आया है। इस मंदिर में करीब 300 लोगों को आसरा मिला है, जिसमें अधिकांश मुस्लिम हैं। कच्छी जिले की भाग नारी तहसील के रतन कुमार इस समय इस मंदिर के प्रभारी हैं। रतन कुमार ने इस मंदिर को लेकर कहा है, “मंदिर में सौ से ज्यादा कमरे हैं। हर साल बलूचिस्तान और सिंध से बड़ी संख्या में लोग तीर्थयात्रा के लिए यहाँ आते हैं। बाढ़ से इस मंदिर को भी नुकसान हुआ है। हालाँकि, इस मंदिर का मूल ढाँचा सुरक्षित है। इसलिए, बाढ़ पीड़ितों को सहारा दिया जा रहा है।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

PFI के ‘मिशन 2047’ में भारत सरकार को उखाड़ फेंकने का लक्ष्य, MP ATS की जाँच में चौंकाने वाले खुलासे: जानें- पाकिस्तानी हैंडलर कैसे...

मध्य प्रदेश के भोपाल से मोहम्मद फराज की गिरफ्तारी के बाद ATS जाँच में PFI के मिशन 2047, पाकिस्तान कनेक्शन, भर्ती और फंडिंग की पड़ताल तेज।

फादर्स डे पर ‘ट्रांस डैड’ की कहानी छापने वाले न्यूयॉर्क टाइम्स पर भड़के लोग: समझें- मुख्यधारा की संस्कृति में ट्रांसजेंडर एक्टिविज्म को कैसे बढ़ावा...

बेटी पूछती है, "डैड, आपके पास कितने समय तक ब्रेस्ट थे?" वो दूसरे बच्चे को जवाब देती है, "मेरे डैड ने दाढ़ी बढ़ाई थी और वह एक लड़की थे।"
- विज्ञापन -