Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयकट्टरवादी समाज वाला पाकिस्तान दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश: पूर्व US डिफेंस सेक्रेट्री

कट्टरवादी समाज वाला पाकिस्तान दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश: पूर्व US डिफेंस सेक्रेट्री

"पाकिस्तान में सरकार के ख़िलाफ़ जिहादी कट्टरता बढ़ती जा रही है। यह एक ऐसे बुरे सपने को साकार कर सकता है जिसमें हमें इस्लामाबाद में एक परमाणु शक्ति संपन्न कट्टरवादी सरकार देखने को मिले। पाकिस्तान और अमेरिका का रिश्ता भी काफ़ी उलझा हुआ है।"

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के पूर्व रक्षा सचिव जिम मैटिस ने कहा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों के साथ डील किया लेकिन पाकिस्तान उनमें सबसे ख़तरनाक देश रहा। न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक बहुत बड़ी समस्या है। मैटिस अफ़ग़ानिस्तान में भी सक्रिय रहे हैं।

अपनी पुस्तक में अमेरिका के पूर्व डिफेंस सेक्रेटरी ने लिखा है कि दुनिया में चल रही हर एक गतिविधि को पाकिस्तान ‘भारत से दुश्मनी’ वाले चश्मे से देखता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इस नीति से अफ़ग़ान लोगों को काफ़ी हानि हुई है। उन्होंने कहा कि ओसामा बिन लादेन को संरक्षण देने वाला पाकिस्तान न सिर्फ़ अफ़ग़ान तालिबान का पोषक रहा है बल्कि उसने आतंकवादी संगठन अलकायदा को भी संसाधन मुहैया कराया है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान जैसे कई ऐसे आतंकी समूह सक्रिय हैं, जो पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंक कर खलीफा का राज स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में समाज अतिवादी होता जा रहा है और ऊपर से वह अपने परमाणु हथियारों के जखीरे में लगातार वृद्धि कर रहा है। मैटिस ने कहा:

“पाकिस्तान में सरकार के ख़िलाफ़ जिहादी कट्टरता बढ़ती जा रही है। यह एक ऐसे बुरे सपने को साकार कर सकता है जिसमें हमें इस्लामाबाद में एक परमाणु शक्ति संपन्न कट्टरवादी सरकार देखने को मिले। पाकिस्तान और अमेरिका का रिश्ता भी काफ़ी उलझा हुआ है।”

69 वर्षीय जिम मैटिस ने 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मतभेदों के कारण रक्षा सचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। यूनाइटेड स्टेट्स मरीन से रिटायर हो चुके मैटिस पर्शियन गल्फ वॉर, अफ़ग़ानिस्तान युद्ध और इराक युद्ध के दौरान अहम भूमिका निभा चुके हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग से बनाई दूरी, CJP में फूट के बाद क्या अब आंदोलन की उलटी गिनती हो...

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग पर छात्र आंदोलन बंटता हुआ दिख रहा है। जहाँ सोनम वांगचुक ने इसे अपनी शर्तों में तरजीह नहीं दी है वहीँ सीजेपी की यह पहली शर्त है।

रवीश कुमार तुम ही पत्रकारों की पिटाई के जिम्मेदार हो, खुद ‘गोदी’ में बैठ करते रहे पत्रकारिता… अब चला रहे ‘गोदी मीडिया’ वाला प्रोपेगेंडा

रवीश कुमार की मौकापरस्ती सिर्फ एक व्यक्ति का पतन नहीं है, बल्कि यह उस विचार का पतन है जो खुद को 'पत्रकार' कहकर जनता को गुमराह करता रहा है।
- विज्ञापन -