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सऊदी अरब में स्कूली छात्राओं ने हिजाब-बुर्का निकाल कर फेंका, पाँव तले कुचला: शो का वीडियो वायरल होने के बाद जाँच का आदेश

साल 2021 में भारत के दो प्रमुख धर्मग्रंथों- रामायण, महाभारत और आयुर्वेद को भी सऊदी अरब के स्कूलों में पढ़ाए जाने की मंजूरी दी गई थी। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इन ग्रंथों को स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल करने का निर्देश दिया था। उम्मीद है कि जल्दी ही इसे पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।

सऊदी अरब के केंद्रीय क्षेत्र अल कासिम के एक स्कूल में “होराइजन्स” नामक स्टेज शो के दौरान स्कूली छात्राओं द्वारा अबाया (बुर्का) उतार कर फेंकने के बाद विवाद बढ़ गया है। विवाद को देखते हुए शिक्षा अधिकारियों ने इसकी जाँच करने का वादा किया है।

दरअसल, एक स्कूल के स्टेज शो के एक ऑनलाइन वीडियो में एक दृश्य दिखाया गया, जिसमें स्कूली छात्राओं का एक समूह अपने काले बुर्के को उतारता है और उन पर चलकर हाथों में रोशनी वाली एक गेंद पकड़े हुए अपने सहयोगी की ओर बढ़ती हैं।

विवाद बढ़ने के बाद सऊदी अरब के अधिकारियों ने इसकी जाँच का आदेश दिया है। इसके साथ ही स्कूल समारोहों के कार्यक्रमों की निगरानी करने और उनकी सामग्री को संशोधित करने के लिए एक समिति के गठन का भी आदेश दिया।

अल कासिम के शिक्षा अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि इस कदम का उद्देश्य ‘इस्लामी मूल्यों और शिक्षाओं’ के अनुरूप शैक्षिक भूमिका को निर्देशित करना है। बता दें कि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह शो कब और कहाँ प्रदर्शित किया गया था।

बताते चलें कि हाल के वर्षों में इस्लामी मुल्क सऊदी अरब ने बाहरी दुनिया से कदम मिलाने के लिए मुल्क में थिएटर और संगीत सहित मनोरंजन के साधनों को मंजूरी दी थी। इसे एक बड़े सामाजिक परिवर्तन के तौर पर देखा गया।

फरवरी 2020 में सऊदी अरब के संस्कृति मंत्रालय से संबद्ध एक सरकारी एजेंसी के रूप में संगीत आयोग की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य संगीत क्षेत्र में विकास को देखना और संगीत शिक्षा तक सबकी पहुँच प्रदान करना था। पिछले सितंबर में एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि दो साल में संगीत शिक्षा किंडरगार्टन स्तर से पढ़ाया जाने लगेगा।

इतना ही नहीं, अप्रैल 2021 में भारत के दो प्रमुख धर्मग्रंथों- रामायण, महाभारत और आयुर्वेद को भी सऊदी अरब के स्कूलों में पढ़ाए जाने की मंजूरी दी गई थी। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इन ग्रंथों को स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल करने का निर्देश दिया था। उम्मीद है कि जल्दी ही इसे पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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