Tuesday, October 19, 2021
2 कुल लेख

अजीत प्रताप सिंह

मसूद की फौज दर्रे में घुसती और दो टुकड़े कर डालते मराठा: शिवा नाई, बाजी और शिवाजी के विशालगढ़ पहुँचने की गाथा

"मेरे बहादुरों। हमारे राजा जब तक गढ़ न पहुँच जाए, तब तक एक भी शत्रु इस दर्रे से होकर नहीं गुजरना चाहिए। मराठी आन की लाज हमारे हाथों में है। हर हर महादेव!"

गाँधी की तमाम कमज़ोरियों के बाद भी उनके योगदान को नकारना मूर्खता है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अतिरिक्त यदि कोई इस बँटवारे का प्रखर विरोधी था तो वो गाँधी थे। मुस्लिम लीग की ज़िद के आगे कॉन्ग्रेस ने घुटने टेक दिए थे, न कि गाँधी ने।

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
129,824FollowersFollow
411,000SubscribersSubscribe