खुद को शांति का मसीहा साबित करने की कोशिश में जुटे पाकिस्तान की ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश गर्त में चली गई है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका की शर्तों को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में अपने अधिकारियों को भेजने से इनकार कर दिया है।
इससे पहले 29 मार्च को इस्लामाबाद में पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी। इस बैठक में पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को खत्म करने के तरीकों पर चर्चा की गई थी। पाकिस्तान ने खुद को इस बातचीत का मध्यस्थ बताया था और अमेरिका का 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव ईरान तक पहुँचाया था।
इस प्रस्ताव में ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमता को रोकने की माँग की गई थी बदले में युद्धविराम की बात कही गई थी। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की भी शर्त रखी गई थी। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस्लामाबाद वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा। उसने कहा है कि वह अपनी शर्तों पर ही युद्धविराम चाहता है।
Oh My God!
— Moeed Pirzada (@MoeedNj) April 3, 2026
Iranians suspect that Trump is using Islamabad Talks as a ploy to lure top Iran leaders in public to get them killed ..American credibility was never that low..! pic.twitter.com/H6n4T9BBIP
इस बीच, ईरान को अमेरिका और पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और ईरान विशेषज्ञ वाली नसर ने कहा कि ईरान को शक है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है। ईरान को डर है कि यह बातचीत एक जाल हो सकती है जिसमें उसके बड़े अधिकारियों को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पहले भी समझौतों से पीछे हट चुका है और इसलिए ईरान को भरोसा नहीं है।

