पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई ‘शांति वार्ता’ विफल होने के बाद मिडिल ईस्ट में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। इस बीच इजराइल और भारत के बीच मिडिल ईस्ट को लेकर अहम बातचीत हुई है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से फोन पर बातचीत की है।
इस बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, ईरान के साथ विफल हुई बातचीत और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सार ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “मेरे मित्र जयशंकर के साथ हमेशा की तरह एक अच्छी बातचीत हुई। हमने ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान पर चर्चा की है।”
उन्होंने आगे बताया, “मैंने कहा कि बातचीत में अमेरिका का सख्त रुख बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी शर्तें तय हों जो ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक सकें। इन शर्तों में यह शामिल है कि ईरान में यूरेनियम संवर्धन (enrichment) न हो और पहले से संवर्धित सामग्री को ईरान से बाहर हटाया जाए। यह पूरी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”
सार ने लिखा, “मैंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को ‘आर्थिक आतंकवाद’ के जरिए नुकसान पहुँचाया जा रहा है। इसके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, ताकि सभी देशों जिसमें भारत और खाड़ी क्षेत्र में हमारे मित्र देश शामिल हैं के लिए समुद्री रास्तों की आज़ादी सुनिश्चित की जा सके।”
A good conversation, as always, with my friend, India’s Minister of External Affairs @DrSJaishankar. We discussed Iran, the Strait of Hormuz, and Lebanon.
— Gideon Sa'ar | גדעון סער (@gidonsaar) April 14, 2026
I said that the firm American stance in the negotiations on conditions that would prevent Iran from obtaining nuclear… pic.twitter.com/miTi4YlXYE
विदेश मंत्री जयशंकर ने भी X पर एक पोस्ट में इस बातचीत को लेकर जानकारी दी। जयशंकर ने लिखा, “आज दोपहर इजरायल के विदेश मंत्री सार के साथ मेरी टेलीफोन पर बातचीत हुई। हमारी चर्चा में पश्चिम एशिया की स्थिति के विभिन्न पहलु शामिल थे।”
पिछले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी बातचीत भी बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। यह वार्ता करीब 21 घंटे तक चली थी। अमेरिका ने कहा कि ईरान उसकी मुख्य शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ। अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की किसी भी कोशिश को पूरी तरह छोड़ दे और अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को कम करे। यही मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना रहा जिसके चलते बातचीत बेनतीजा रही।

