प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र अब हमारे बीच नहीं रहे। 91 साल की उम्र में पंडित छन्नूलाल ने गुरुवार (2 अक्टूबर 2025) की सुबह लगभग 4:15 बजे मिर्जापुर में अपनी बेटी के घर अंतिम सांस ली।
पंडित छन्नूलाल मिश्र का जाना भारतीय संगीत के लिए एक बड़ी हानि है। वह किराना-बनारस घराने के एक महान प्रतिनिधि थे। उन्हें खासकर ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती और भजन जैसी शैलियों में उनकी भावपूर्ण गायकी के लिए याद किया जाएगा। उनका जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुआ था। उन्होंने मुजफ्फरपुर, बिहार में संगीत की शिक्षा ली और लगभग 40 साल पहले वाराणसी को अपनी कर्मभूमि बनाया।
लोकप्रिय गायकी और सम्मान
शास्त्रीय गायन के साथ-साथ पंडित छन्नूलाल मिश्र ने भारतीय लोक संगीत को भी बहुत ऊँचाई दी। काशी की होली का उनका विशेष भजन ‘फागुन मास के समय खेले मसाने में होली दिगम्बर’ बेहद लोकप्रिय था। यह गीत भगवान शिव द्वारा श्मशान में होली खेलने के प्रसंग पर आधारित है।
संगीत में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। इनमें पद्म भूषण (2010) और देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण (2020) शामिल हैं। वह ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के भी शीर्ष ग्रेड कलाकार थे।
प्रधानमंत्री ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा कि पंडित जी ने अपना पूरा जीवन भारतीय कला और संस्कृति को समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने यह भी याद किया कि 2014 में वाराणसी सीट से जब उन्होंने चुनाव लड़ा था, तब पंडित छन्नूलाल मिश्र उनके प्रस्तावक रहे थे। प्रधानमंत्री ने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान… pic.twitter.com/tw8jb5iXu7
— Narendra Modi (@narendramodi) October 2, 2025
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महान गायक का अंतिम संस्कार वाराणसी में किया जाएगा। पंडित छन्नूलाल मिश्र का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए संगीत और कला के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

