प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में सरदारधाम हॉस्टल का उद्घाटन करते हुए देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील दोहराई। यह 24 घंटे में उनकी दूसरी अपील है। उन्होंने स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेस और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता देने की बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के वडोदरा में सरदारधाम भवन-3 का उद्घाटन किया। इस भवन की लागत 150 करोड़ रुपए है। यह सरदारधाम कॉम्प्लेक्स के विस्तार का हिस्सा है, जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को रहने और पढ़ने की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही उन्होंने शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी कई नई योजनाओं की घोषणा भी की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस दिन को पुण्य पर्व बताया। उन्होंने कहा कि इससे पहले वे सोमनाथ में थे, जहाँ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने का आयोजन चल रहा है। सरदार पटेल के संकल्प से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था।
पीएम मोदी ने देश के राजनीतिक माहौल का जिक्र करते हुए हाल के चुनावी नतीजों पर खुशी जताई। गुजरात के निकाय और पंचायत चुनावों को शानदार बताया। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के युवा स्टार्टअप्स में आगे आ रहे हैं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। मुद्रा योजना, आयुष्मान भारत, मातृ वंदना और नल से जल जैसी योजनाएँ महिलाओं और परिवारों को सशक्त बना रही हैं।
Speaking at the inauguration of Sardardham Hostel in Vadodara. https://t.co/n6YSMRiWyq
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
वैश्विक हालात पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। कोरोना महामारी, आर्थिक चुनौतियाँ और पश्चिम एशिया में तनाव इसका कारण हैं। इनका असर भारत पर भी पड़ रहा है, लेकिन देश मिलकर हर संकट का सामना कर सकता है।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि देश के संसाधनों पर बोझ कम करें। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कारपूलिंग अपनाने, वर्चुअल मीटिंग्स बढ़ाने और डिजिटल तकनीक का ज्यादा उपयोग करने की सलाह दी। सोने की खरीद कम करने, फर्टिलाइजर का सीमित उपयोग करने और वोकल फॉर लोकल को जन आंदोलन बनाने की भी अपील की।
पीएम मोदी ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियाँ और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव। इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी… तो पश्चिम एशिया में युद्ध से बनी परिस्थितियाँ… इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। जब हमने मिलकर कोरोना का मुकाबला कर लिया तो इस संकट से भी अवश्य पार पा जाएँगे। सरकार भी लगातार ये प्रयास कर रही है, कि देश के लोगों पर इसका कम से कम असर हो।”
उन्होंने आगे कहा, “पहले के दशकों में भी जब-जब देश युद्ध या किसी और अन्य बड़े संकट से गुजरा है, सरकार की अपील पर हर नागरिक ने ऐसे ही अपना दायित्व निभाया है। आज भी जरूरत है कि हम सब मिलकर अपना दायित्व निभाएँ… देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम करें। हमें हर छोटे-बड़े प्रयास से ऐसे उत्पादों का उपयोग कम करना है, जो विदेश से आते हैं… और ऐसे व्यक्तिगत कामों से भी बचना है जिसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती हो।”

