विषय: indira gandhi

सीएम उद्धव ठाकरे के साथ शिवसेना सांसद संजय राउत

करीम लाला पर उद्धव सरकार में खींचतान, कॉन्ग्रेसी मंत्री ने कहा- ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते हैं

"इंदिरा गॉंधी हमारी नेता और आदर्श हैं। बीजेपी के साथ रहते हुए भी संजय राउत उनके खिलाफ टिप्पणियॉं करते थे। अब सरकार में होने के बाद भी वे इससे बाज नहीं आ रहे। यदि वे सोचते हैं कि हम चुपचाप सुनते रहेंगे तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते हैं।"
इंदिरा-करीम लाला

संजय राउत सही, गैंगस्टर करीम लाला से मिलती थीं इंदिरा: डॉन हाजी मस्तान के बेटे का खुलासा

अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान के गोद लिए हुए पुत्र सुंदर शेखर ने शिवसेना नेता संजय राउत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संजय राउत सही हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गाँधी करीम लाला से मिलती थीं। कई अन्य नेता भी आते थे। हाजी मस्तान एक व्यापारी थे। बालासाहेब ठाकरे भी हाजी मस्तान के अच्छे दोस्त थे।
संजय राउत, इंदिरा गाँधी

‘गैंगस्टर करीम लाला खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे’ – कॉन्ग्रेस की खातिर संजय राउत ने मारी पलटी

"करीम लाला अफ़ग़ानिस्तान से आए पठानों के नेता थे। उन्होंने 'पख्तून-ए-हिंद' नामक एक संगठन का नेतृत्व भी किया था। उनसे बहुत से लोग मिलने के लिए जाया करते थे। इसमें कई राजनेता भी शामिल थे। जो भी नेता उनसे मिलने आते थे, उनसे पठान नेता के रूप में मुलाकात करते थे।"
गैंगस्टर करीम लाला, संजय राउत, पूर्व पीएम इंदिरा गांधी

इंदिरा गाँधी जिस अंडरवर्ल्ड डॉन से मिलने जाती थीं, वो एक अफगानी तस्कर था: शिवसेना नेता के बयान पर हंगामा

करीम लाला मूल रूप से अफगानिस्तान से था। उसका असली नाम अब्दुल करीम शेर खान था। उसका परिवार काफी संपन्न था। लेकिन ज्यादा कामयाबी की चाह में वो हिंदुस्तान आया और 1960 से 1980 के बीच में मुंबई अंडरवर्ल्ड का एक बड़ा नाम बन गया। वह मुंबई में कच्ची शराब की भट्ठियाँ और जुए के अड्डे चलवाता था।
सिख दंगे

1984 दंगाः सिख यात्रियों को ट्रेनों से घसीटकर मारा गया, पुलिस तमाशबीन बनी रही, SIT रिपोर्ट

SIT की रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रेन में सफर कर रहे सिख यात्रियों की ट्रेन और रेलवे स्टेशनों पर हमला करने वाले लोगों द्वारा हत्या किए जाने के पाँच मामले थे।
प्रियंका गाँधी

कॉन्ग्रेस क्या तो बचाए… अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन, RaGa को या फिर इंदिरा गाँधी की नाक?

प्रियंका गाँधी के जन्मदिन की सुबह दैनिक भास्कर अख़बार के पहले पन्ने पर ही इंदिरा गाँधी के साथ उनकी तुलना करते हुए कॉन्ग्रेस के नेता जी द्वारा लिखी गई प्रशंसा तो यही बता रही है कि ट्विटर पर आधी रात को किए गए उनके मन्त्र जाप का असर प्रियंका गाँधी पर जल्द ही होने वाला है।
राहुल कँवल, जेएनयू, इंडिया टुडे

वामपंथियों की फालतू नारेबाजी, और बर्बाद होता JNU: राहुल कँवल पढ़ें ‘इंडिया टुडे’ की 40 साल पुरानी रिपोर्ट

1981 का एक ऐसा समय था, जब जेएनयू को 46 दिनों के लिए बंद किया गया था। आज फ़र्ज़ी 'स्टिंग ऑपरेशन' कर के वामपंथियों को बचाने वाले 'इंडिया टुडे' ने तब JNU को वामपंथी अराजकता का गढ़ बताया था, जहाँ छात्र फालतू वाद-विवाद में लगे रहते हैं। पत्रिका ने कहा था कि जेएनयू केवल रुपए डकारता है।
उद्धव ठाकरे

बालासाहब को हत्यारा और नौकर बताने वाले अर्बन नक्सल को रिहा करो: CM उद्धव से NCP विधायक ने कहा

अपनी किताब में उसने दावा किया कि हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए बालासाहेब ने दलितों की हत्या तक करवा दी थी। सुधीर ने अपनी इस किताब में 1974 के वर्ली दंगे का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि इस दौरान मराठवाड़ा की दलित महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट, सिख विरोधी दंगे

1984 सिख विरोधी दंगों पर SIT की जाँच पूरी, सीलबंद रिपोर्ट SC में: फँस सकते हैं कई कॉन्ग्रेसी नेता!

1984 में इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे। दंगों में सिख समुदाय के हज़ारों लोग मारे गए थे। कुछ वरिष्ठ राजनेताओं, जिनमें से कई कॉन्ग्रेस पार्टी से थे, उन पर हिंसा भड़काने और हमले का आरोप लगाया गया था।
इंदिरा गाँधी, विलायत बेग़म (फाइल फोटो)

मुस्लिमों को ख़ुश करने के लिए इंदिरा ने पागल महिला के सामने टेके थे घुटने: दे दिया था दिल्ली का महल

एक ज़माने में फ़िरोज़शाह तुगलक जब शिकार पर निकलते थे तो इसी महल में ठहरते थे। 1993 के बाद इस मालचा महल को लेकर कई जनश्रुतियाँ प्रचलित हुईं, जिनमे कहा गया कि इस महल में रहने वाली विलायत बेग़म ने हीरे को पीसकर निगल लिया और आत्म-हत्या कर ली।
वीर सावरकर, इंदिरा गाँधी

‘वीर सावरकर थे भारत के महान सपूत’ – पढ़ें वो खत जिसे इंदिरा गाँधी ने खुद लिखा था

पत्र में इंदिरा गाँधी ने न केवल सावरकर को "भारत का विशिष्ट पुत्र" बताया था, बल्कि यह भी कहा था कि उनका ब्रिटिश सरकार से निर्भीक संघर्ष स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास में अपना खुद का महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
जेपी नारायण, इंदिरा गाँधी

जेपी जन्मदिन पर: उनकी अव्यवहारिक क्रांति के चेले आज भी प्रयोग के मूड में रहते हैं

जेपी ने अव्यवहारिक राजनीति की, वे ऐसी मसीहाई भूमिका में आ गए थे, जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई और अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ाई को एक ही तराजू में तौल रहे थे। उन्हें उम्र के उस अंतिम पड़ाव में जरा भी भान नहीं हुआ कि जो लोग उनकी पालकी उठा रहे हैं, उनकी मंशा क्या है?

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