भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
जिस समाज को आप नहीं समझते, वहाँ बस अपनी विचारधारा से मिलते लोगों को साथ मिल लेने से आप ज्ञानी नहीं हो जाएँगे, न ही इन्क्लूसिव और प्लूरलिस्ट। आप वहाँ अपनी अज्ञानता के कारण जैक से जैकऐस बन जाएँगे।