Wednesday, August 4, 2021
486 कुल लेख

अजीत भारती

पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

‘एक बेटा तो चला गया, कोर्ट-कचहरी में फँसेंगे तो वो बाकियों को भी मार देंगे’: बंगाल पुलिस की क्रूरता के शिकार एक परिवार का...

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा आम बात है। इसी तरह की एक घटना बैरकपुर थाना क्षेत्र के भाटपाड़ा में जून 25, 2019 को भी हुई थी, जब रिलायंस जूट मिल पर कुछ गुंडों ने बम फेंके थे।
00:14:56

तिरंगा यात्रा निकालने और हिन्दुओं के घर के सामने बीफ फेंकने के विरोध पर मारी गोली: RSS कार्यकर्ता ने याद किया वो मंजर

दिसंबर 2019 की वो घटना याद होगी, जब बीर बहादुर सिंह नामक RSS कार्यकर्ता को कोलकाता के मेटियाब्रुज में गोली मारी गई थी। सुनिए क्या कहते हैं वो।

बंगाल चुनाव ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा जब जवानों को मरवा रही है तो आम लोगों को क्या छोड़ेगी- बंगाल के मुस्लिम युवा

हमने पाया कि युवाओं का मूलत: ये मानना है कि यहाँ पर शांति व्याप्त है। कहीं पर भी कोई हिंसा नहीं हो रही है और यदि कहीं हिंसा हो भी रही है तो उसमें भाजपा का हाथ है। वो अपनी राजनीति चमकाने के लिए हिंसा कर रहे हैं।
00:46:30

आखिर आम आदमी को इस बजट से क्या मिल गया? Just usual promises or realistic vision?

ऑपइंडिया ने बजट को सरल भाषा में समझने के लिए के लिए SRCC (दिल्ली विश्वविद्यालय) के Dept of Economics में सहायक प्रोफेसर अभिनव प्रकाश से बात की।
00:52:56

S02E09: क्या बकैत को पता था लाल किला और दंगों का?

बकैत के पोस्ट और प्राइम टाइम से पता चलता है कि उसे मालूम था कि किसान क्या करने वाले हैं!
00:48:51

Video: ‘किसान’ नेता स्वतंत्र क्यों घूम रहे हैं? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं?

सिंघु बॉर्डर पर किसान क्यों हैं अभी भी? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं? मीटिंग तो एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन असामान्य परिस्थिति में रूटीन से बाहर क्यों नहीं है सरकार? टिकैत, योगेन्द्र यादव समेत वो चालीस किसान नेता क्यों नहीं हैं कस्टडी में? सरकार जवाबदेही तक क्यों नहीं तय कर पाई है?
00:32:37

मीलॉर्ड! आज खुश तो बहुत होंगे आप: ऑपइंडिया एडिटर के चंद सवाल

शायद अब सुप्रीम कोर्ट को लगेगा कि औरों के भी संवैधानिक अधिकार हैं, लिब्रांडू मीडिया गिरोह इसे सफल आंदोलन करार देगा, जबकि पुलिस पर तलवारों से हमले हुए हैं!
00:25:31

गणतंत्र दिवस पर लिब्रांडुओं के नैरेटिव के लिए आप तैयार हैं?

कल की मीडिया में वामपंथियों और लिब्रांडुओं के नैरेटिव की झलक आज देख लीजिए ताकि आपको झटका न लगे!

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