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झारखंड में लगेगा बागेश्वर धाम का दरबार, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए दी अनुमति, कहा-कानून व्यवस्था का बहाना नहीं बना सकते

झारखंड में बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से हनुमान कथा का आयोजन किया जाएगा। हालाँकि, प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी है। इसके बाद झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद हाई कोर्ट ने हनुमान कथा के आयोजन के लिए हरी झंडी दे दी है। यह कार्यक्रम 10 से 15 फरवरी 2024 के बीच पलामू में आयोजित किया जाएगा।

झारखंड में बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से हनुमान कथा का आयोजन किया जाएगा। हालाँकि, प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी है। इसके बाद झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद हाई कोर्ट ने हनुमान कथा के आयोजन के लिए हरी झंडी दे दी है। यह कार्यक्रम 10 से 15 फरवरी 2024 के बीच पलामू में आयोजित किया जाएगा।

दरअसल, हनुमंत कथा आयोजन समिति ने कार्यक्रम के लिए अनुमति माँगी थी। जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया था।। इसके बाद आयोजन समिति (समिति) ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए कार्यक्रम को रद्द नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्यक्रम आयोजकों को सभी आवश्यक सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था का पालन करना होगा। हाई कोर्ट कोर्ट ने कथा आयोजन समिति को अनुमति देते हुए कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रशासन प्रतिबंध लगा सकती है, लेकिन ऐसे प्रतिबंधों का आधार संविधान के अनुच्छेद 19(3) में उल्लेखित आधार के अनुरूप ही होना चाहिए।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस आनंद सेन ने कहा, “इस मामले में प्रशासन ने अपने जवाब में बिना किसी डेटा (लोग क्यों जुट रहे हैं और उनकी कितनी संख्या हो सकती है) के सिर्फ कानून और व्यवस्था की समस्या बताते हुए अनुमति नहीं दी। प्रशासन ने इस कथा के आयोजन के दौरान बैठने की व्यवस्था, पार्किंग की जगह की कमी और भीड़ को मैनेज करने के लिए स्वयंसेवकों की कमी के बारे में दलील दी।”

जस्टिस आनंद सेन ने आगे कहा, “अगर कोर्ट इन बातों को मान भी ले तो ये ‘कानून और व्यवस्था की समस्या (Law and Order)’ नहीं है। आपने जिन बातों को गिनवाया, वैसी समस्याएँ सार्वजनिक कार्यक्रमों में आ सकती हैं। इसे कार्यक्रम स्थल पर सुविधाओं की कमीं कह सकते हैं, लेकिन ये कानून व्यवस्था का मामला बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे में इस कथा पर रोक लगाने का आधार बिल्कुल गलत है।”

कोर्ट ने जोर दिया कि अनुच्छेद 19(1)(बी) भारत में नागरिकों के बिना हथियारों के शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का मौलिक अधिकार देता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वो कार्यक्रम के बारे में पूरी योजना बनाकर कोर्ट में पेश करें। इसमें हर दिन पहुँचने वाले लोगों की संख्या, उनके लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं की जानकारी हो ताकि कथा में शामिल होने वाले लोगों के बैठने, ठहरने, पार्किंग इत्यादि की व्यवस्था की जा सके।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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