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‘बॉस’ का आया वीडियो कॉल, कर्मचारी ने भेज दिए ₹212 करोड़: डीपफेक से मल्टीनेशनल कंपनी को लूटा, AI की मदद से की गई थी कॉन्फ्रेंस कॉल

पूरा मामला हॉन्गकॉन्ग का है। वहाँ डीपफेक कॉल की मदद से एक मल्टीनेशनल कंपनी को 213 करोड़ रुपए का चूना लगा दिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि वीडियो में सिर्फ एक नहीं, कई एप्लॉय के चेहरे जनरेट किए गए।

दुनिया में डीपफेक धीरे-धीरे बड़ा खतरा बन रहा है। अभी तक आप जानी-मानी हस्तियों को इसका शिकार होते कई बार देख चुके हैं। लेकिन अब मामला चौंकाने वाला आया है। एक कंपनी इसके कारण वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हुई है, जो इसी तकनीक के जरिए अंजाम दिया गया।

पूरा मामला हॉन्गकॉन्ग का है। वहाँ एक कंपनी को डीपफेक कॉल की मदद से एक मल्टीनेशनल कंपनी को 212 करोड़ रुपए का चूना लगा दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डीपफेक का इस्तेमाल कर फ्रॉड करने वाले ने कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) का फोटो इस्तेमाल करके ऑफिस कर्मचारी को कॉन्फ्रेंस कॉल की और उसे पैसे भेजने को कहा। कर्मचारी ने भी वीडियो कॉल पर अपने सीएफओ को देख 2 फरवरी को इतना बड़ा अमाउंट ट्रांस्फर कर दिया।

बाद में पता चला कि उनके साथ कितना बड़ा फ्रॉड हुआ है। हॉन्गकॉन्ग का यह पहला मामला है इसलिए किसी ने सोचा भी नहीं था ऐसा हो सकता है। फ्रॉड के बाद कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि पैसों की माँग के लिए एक ईमेल जनवरी में आया था मगर तब उन लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

उन्हें लगा जो सीएफओ की ओर से कॉल आई है उसमें सभी लोग कंपनी के होंगे। कर्मचारी का कहना भी है कि कॉल पर जो लोग दिखाई दे रहे थे वो उनमें से कइयों के चेहरे जानता था इसलिए उसने आसानी से विश्वास कर लिया। उसे नहीं पता था वो सारे लोग डीपफेक की मदद से क्रिएट किए गए थे।

एम्प्लॉय ने बताया कि वीडियो कॉल पर उससे उसका परिचय माँगा गया जैसे आमतौर पर कोई सीनियर माँगता है। इसके बाद डीपफेक करने वाले फ्रॉड से एक हफ्ता ये सोचकर बात चली कि वो कंपनी के सीएफओ हैं। इस दौरान कर्मचारी से 200 मिलियन हॉन्गकॉन्ग डॉलर (25.6 मिलियन डॉलर/ 2 अरब 12 करोड़ 32 लाख 38 हजार रुपए) के 15 ट्रांजैक्शन करवाए गए।

कंपनी से इतना पैसा जाने के बाद जब इसका पता लगाया गया तो हेडक्वार्टर और कर्मचारी दोनों के बीच बात हुई। तब, पता चला कि इस तरीके से उस कर्मचारी पर डीपफेक कॉल आई थी जिसने सीएफओ के चेहरे का प्रयोग करके उससे पैसे माँग लिए।

इस घोटाले का खुलासा करते हुए पुलिस अधिकारी ने बताया है कि तमाम लोगों के चेहरे लगाकर वीडियो कॉन्फ्रेंस हुई थी, लेकिन वो सब डीपफेक थे। उन्होंने कर्मचारी को अपनी बात में फँसाकर कंपनी के पैसे लूट लिए।

अब मामले की जाँच की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि उन्होंने ऐसे फ्रॉड केसों में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित लोगों का आईडी चुराकर 90 लोन एप्लीकेशन 54 बैंक में दे चुके हैं। वहीं कम से कम 20 मामलों में AI डीपफेक के जरिए बेवकूफ बनाया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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