Tuesday, October 19, 2021
129 कुल लेख

अजीत झा

देसिल बयना सब जन मिट्ठा

‘ये तो कसाई हैं, किसान थोड़े हैं’: कुंडली बॉर्डर पर युवक की बर्बर हत्या के बाद कसार के सरपंच ने याद दिलाया कैसे जिंदा...

कुंडली बॉर्डर पर बर्बर हत्या से पहले टिकरी बॉर्डर से किसानों के टेंट में मुकेश को जिंदा जलाए जाने की खबर भी आ चुकी है।

बेगानी कामयाबी में बिहारी दीवाना, UPSC टॉपर शुभम कुमार के बहाने कुछ कड़वी बातें

UPSC में शुभम की इस सफलता से बिहार के उन सभी विश्वविद्यालयों के सत्र नियमित हो जाएँगे जो 3 साल की डिग्री देने में 5-6 साल भी लगा देते हैं?

राजनीति के कालनेमि जप रहे लक्ष्मी-दुर्गा का नाम, गले में रामनामी-माथे पर चंदन: यूपी का चुनाव आया है क्या

राजनीति के कालनेमि जिस तरीके से चोले बदल अपने-अपने दड़बों से निकल रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव आ गया है।

‘बॉस’➔यशपाल कपूर➔इंदिरा गाँधी… 1975 में हुई जिस ललित नारायण मिश्र की हत्या उनके परिवार को आज भी ‘न्याय’ का इंतजार

क्या राजनीतिक हत्या थी एलएन मिश्र की मौत? क्यों सीबीआई जाँच पर पीड़ित परिवार को नहीं है भरोसा? इंदिरा गाँधी से कैसे थे रिश्ते?

कल्याण सिंह एक प्रयोग हैं, प्रयोग मरते नहीं: वह फॉर्मूला जिसके दम पर BJP आज अपराजेय है, जिसने हिंदुओं को जोड़ा

कल्याण सिंह ने राम का स्वप्न पूरा किया। अब कृष्ण और शिव के स्वप्नों को पूरा करने की बारी हमारी और आपकी है।

भारत का विपक्ष भी चुटकुला है! यहाँ ‘कृष्ण-अर्जुन’ में हो रहा पंगा, अध्यक्षविहीन पार्टी कह रही- अपना टाइम आ गया

जब भारत के कठमुल्ले तालिबान की वापसी पर भांगड़ा कर रहे हैं, देश के विपक्षी दल भी इस बात को पुख्ता करने में लगे हैं कि जनता के मनोरंजन में कोई कमी न रह जाए।

चापाकल माफ करना! मैं बचपन से बेवजह तुम्हे कॉन्ग्रेस के नाम करता रहा

अल्पज्ञान की वजह से कॉन्ग्रेस बरसों से इसका क्रेडिट लिए बैठी थी... जबकि चापाकल घर-परिवार छोड़ दूर गए किसी के पुरुषार्थ का नतीजा था।

ये नंगे, इनके हाथ अपराध में सने, फिर भी शर्म इन्हें आती नहीं… क्योंकि ये है बॉलीवुड

राज कुंद्रा या गहना वशिष्ठ तो बस नाम हैं। यहाँ किसिम किसिम के अपराध हैं। हिंदूफोबिया है। खुद के गुनाहों पर अजीब चुप्पी है।

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