Wednesday, September 30, 2020
52 कुल लेख

अजीत झा

देसिल बयना सब जन मिट्ठा

संजय सिंह और डेरेक ओ ब्रायन ने ईशान करण की चिट्ठी नहीं पढ़ी… वरना पत्रकार हरिवंश से पंगा न लेते

दूर बैठकर भी कर्मचारियों के मन को बखूबी पढ़ लेने वाले हरिवंश जी, अब आसन पर बैठ संजय सिंह, डेरके ओ ब्रायन की 'राजनीति' को पढ़ हँसते होंगे।

नरेंद्र मोदी: यह नाम लेते ही आपके जेहन में कैसी तस्वीर उभरती है?

नरेंद्र मोदी, यानी एक ऐसा नेता जो कोई भी बड़ा निर्णय ले सकता है, चाहे विकास के एजेंडे पर हो या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा।

देखले दरभंगा, चिन्हले चपरासी: नाम वाले गुलाम किनारे, ‘नामदार’ के वफादारों को प्रमोशन से कॉन्ग्रेस का कितना भला?

व्यापक फेरबदल के नाम पर ओल्ड गार्ड को किनारे कर कॉन्ग्रेस ने युवराज के वफादारों को भाव दिया है। यह उस यो​जना का हिस्सा है जो अध्यक्ष पद पर राहुल गॉंधी की दोबारा ताजपोशी से पूरी होनी है।

तेजप्रताप के लिए रघुवंश ‘एक लोटा पानी’… फिर उनके इस्तीफे से लालू इतने बेचैन क्यों?

भले रघुवंश प्रसाद सिंह का प्रभाव सीमित हो। लेकिन लालू जानते हैं कि उनके बिना तेजस्वी की चुनावी राजनीति सुरक्षित नहीं है। सो, मनाने की कोशिशें जारी है।

सुशांत मामले में मीडिया ट्रायल पर रोने वाले राजदीप सरदेसाई की ‘त्रि-या चरित्र’ पत्रकारिता

राजदीप के लिए सुशांत भले बड़े स्टार नहीं थे पर रिया चकवर्ती का प्रोफाइल इतना बड़ा है कि उसे घंटों सफाई देने का मंच मुहैया कराया जाता है।

एक थी रामगोपाल वर्मा की आग और एक है कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी, दोनों में बस धुआँ ही धुआँ है

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से जब भी पर्दा उठेगा तो गाँधी ही निकलेंगे। या तो कुर्सी पर बैठा गाँधी या फिर पर्दे के पीछे से कुर्सी को नचाता गाँधी। 'गैर गॉंधी अध्यक्ष' महज जुमला है।

‘वहॉं नुकीले पत्थर निकले हैं… तो जमीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा’

आज NRC और CAA पर जिस तरह भ्रम का माहौल बनाने की कोशिश हो रही। समुदाय विशेष को उकसाया जा रहा। ऐसा ही कभी अयोध्या में राम मंदिर को लेकर कॉन्ग्रेसियों और वामपंथियों ने किया था। तब संसद में वाजपेयी ने कहा था...

राम मंदिर भूमिपूजन के बाद पहली स्वतंत्रता दिवस के मायने, क्योंकि अयोध्या से आगे मथुरा-काशी भी है…

एक तरफ है करीब 1000 साल से चल रहा छल, प्रपंच और जोर। दूसरी तरफ है हिंदुओं का वह नैतिक बल, जिसका पहला पड़ाव सोमनाथ का पुनरुद्धार था। वह भारतीय चेतना, जिसकी अप्रतिम ऊर्जा अयोध्या है। वह सनातनी संस्कृति, जिसका प्रकाश पुंज मथुरा-काशी है।

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