अजीत झा

देसिल बयना सब जन मिट्ठा

मुक्ति मार्ग पर 2 कदम और बढ़ी कॉन्ग्रेस, ऐसी हताशा न कभी देखी न सुनी

कहते हैं कि आदमी को आगे से हॉंकते हैं और बैल को पीछे से। पार्टी तो जीते-जागते, विचारों से लैस लोगों का ही संगठन होता है। सो, कायदे से उसका भी नेतृत्व आगे से होना चाहिए। लेकिन, आज कॉन्ग्रेस को पीछे से हॉंकने को भी कोई तैयार नहीं है।

कट्टरपंथी मुसलमानों और वामपंथियों का तीन तिकड़म, राम मंदिर लटकाएँगे और टपकाएँगे

वे पर्दे के पीछे से साजिश रचेंगे और डराने के लिए खून भी बहाएँगे। वे चाहेंगे कि माहौल बिगड़े ताकि मंदिर निर्माण टलता रहे। वे नक्शे को फाड़ेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि जिस दिन हिंदू जगेगा उनका इतिहास हर गली-नुक्कड़ पर फाड़ा जाएगा।

वे प्रपंच रच रहे हैं पर अयोध्या के शोर में मथुरा-काशी का दर्द न दबे

अयोध्या का करीब 500 साल का इतिहास जोर, छल और प्रपंच का ही गवाह है। मुस्लिम आक्रांताओं के हथियारों का जोर, वामपंथी इतिहासकारों का छल और प्रपंच की कॉन्ग्रेसी कला पर खड़ा है पूरा विवाद।

रामलला का लॉन टेनिस से क्या है रिश्ता, अयोध्या-मथुरा-काशी की कैसे पड़ी नींव?

यज्ञ के दौरान उन हिंदू धर्म स्थलों की मुक्ति पर चर्चा होती है, जिन पर विदेशी अक्रांताओं ने कब्जा किया था। फिर अयोध्या के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि को दोबारा हासिल करने की विस्तृत योजना तैयार होती है।

200 किमी पैदल चलकर अयोध्या पहुॅंचे दो भाई, गुंबद पर चढ़ भगवा ध्वज लहराया

राम और शरद ने 22 अक्टूबर की रात ट्रेन पकड़ी। बनारस आकर रुके। टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए। सड़क रास्ता बंद था। 200 किलोमीटर पैदल चल अयोध्या पहुॅंचे और विवादित इमारत के गुंबद पर चढ़ भगवा ध्वज फहरा दिया।

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