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जयन्ती मिश्रा

27 साल जेल, टूटा परिवार और अब रिहाई की उम्मीद: दारा सिंह केस के अनसुने पहलू

दारा सिंह, ईसाई मिशनरियों के रैकेट का अंत करने की लड़ाई लड़ रहे थे। वहीं दूसरी तरफ ग्राहम स्टेंस जनजातीयों के ब्रेनवॉश में जुटा था।

‘मुस्लिम होने के कारण फँसा ताहिर हुसैन’ : दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के बाद बचाव में उतर गया था पूरा वामपंथी गैंग, पूछ...

आईबी के अंकित शर्मा की हत्या कभी भी कट्टरपंथियों और वामपंथियों के लिए चर्चा करने का विषय नहीं रही, उन्हें चिंता हमेशा ताहिर हुसैन की थी।

‘तुम्हारी गौमाता का मीट खा रहा हूँ… ग@#D में दम हो तो रोककर दिखाओ’: इंस्टा पर वायरल होने के लिए हैदर अली के घटिया...

हैदर अली अपने इंस्टा पर गौमांस की वीडियोज को डालता है और हिंदुओं को अंधभक्त कहकर मीट देखने को कहता है। अपने चैनल पर उसने 1 महीने में 10 से ज्यादा ऐसी वीडियो डाली है।

खंजर से चीरी कोख, निर्वस्त्र की गई बहन… सब भूल जाओ, जिया की चाँद बाली पर लिखो नज्म: पढ़िए Arfa Khanum को क्यों भायी...

इम्तियाज अली की फिल्म में जिया और कीनू की प्रेम कहानी विभाजन की असली वीभत्सता को सूफियाना रोमांस के पीछे छिपाने की शातिर कोशिश है।

आरफा जी, बेवकूफ तो आपने उन सेकुलर हिंदुओं को बनाया है जिन्होंने आपको ‘पत्रकार’ समझा

आरफा अगर इस्लामी कट्टरपंथियों के बचाव का काम और भारत सरकार की बुराई करना वो छोड़ दें तो उन्हें उनके अपने दर्शक ही नहीं पूछेंगे।

जहाँ पहले होते थे दंगे-हत्या, उस UP में कानून-व्यवस्था की बेहतर हुई तस्वीर: NCRB 2024 के आँकड़ों में दिखा बंगाल-तमिलनाडु-केरल-पंजाब से बेहतर माहौल

उत्तर प्रदेश की खासियत यह है कि इतनी अधिक जनसंख्या, अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक स्थितियों और बड़े प्रशासनिक ढाँचे के बावजूद वहाँ अपराध दर नियंत्रण में रही।

प्रिय मीडिया कब तक बेचते रहोगे किसानों की ये दुखांत कहानियाँ, उन्हें क्यों नही बताते उनको ही ‘मंडी-दलालों’ से मुक्त कराने के लिए मोदी...

एक किसान तीन महीने की मेहनत के बाद 1262 किलो प्याज 25 बोरे में भरकर मंडी गया, लेकिन वहाँ उन्हें नुकसान हुआ। अब मीडिया इस कहानी को सुना रहा है लेकिन ये कृषि कानून पर कुछ नहीं बता रहा।

15000+ हिंसा की घटनाएँ, 40000+ हिंदू शिकार और 7000+ महिलाओं पर अत्याचार: याद है 2021 में बंगाल में क्या हुआ था जब लौटी थी...

आज जब बंगाल एक नए दौर की ओर बढ़ने को तैयार हो रहा है, तो 2021 की उन भयावह यादों को ताजा करना जरूरी है, ताकि वर्तमान परिवर्तन की अहमियत को समझा जा सके।