एक किसान तीन महीने की मेहनत के बाद 1262 किलो प्याज 25 बोरे में भरकर मंडी गया, लेकिन वहाँ उन्हें नुकसान हुआ। अब मीडिया इस कहानी को सुना रहा है लेकिन ये कृषि कानून पर कुछ नहीं बता रहा।
एक्टिविज्म के नाम पर विक्रमादित्य सहाय प्रोफेसर होते हुए अधनंगी तस्वीरों को साझा करते हैं और शिक्षा के नाम पर वह छात्रों को हिंदू विरोधी बातें सिखाते हैं।
ये कट्टरपंथी जमात मजहब देखकर सबाब का काम करती है और ये भूल जाती है कि जिस सेना को ये लोग 'शराबी-बलात्कारी' बताते हैं वही सेना हर मुश्किल घड़ी पर सबसे आगे मदद के लिए रहती है।
आरफा को भारत के 'हिंदू राष्ट्र' कहलाए जाने से दिक्कत है, क्योंकि आरफा के दिमाग में गलतफहमी है कि भारत में संस्कृति और सभ्यता का विकास मुगलों के आने के बाद हुआ।
सोशल मीडिया पर वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी जहाँ मुस्लिम पक्ष का नैरेटिव फैलाने में जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं वहीं बीबीसी ने प्रयास किया कि मामले से मजहबी एंगल बिलकुल दूर ही रखें।