Friday, October 2, 2020
168 कुल लेख

जयन्ती मिश्रा

लड़कियों को भी चाहिए सेक्स, फिर ‘काटजू’ की जगह हर बार ‘कमला’ का ही क्यों होता है रेप?

बलात्कार आरोपित कटघरे में खड़ा और लोग तरस खा रहे... सबके मन में बस यही चल रहा है कि काश इसके पास नौकरी होती तो यह आराम से सेक्स कर पाता!

छद्म नारीवाद और हिंदू घृणा का जोड़: भारतीय संस्कृति पर हमला बोल कर कहा जाएगा- ‘ब्रेक द स्टिरियोटाइप्स’

यह स्टिरियोटाइप हर पोशाक की कतरनों के साथ क्यों नहीं ब्रेक किए जाते? हिंदुओं के पहनावे पर ही ऐसा प्रहार क्यों? क्यों नन की ड्रेस में मॉडल आदर्श होती है? क्यों बुर्के को स्टिरियोटाइप का हिस्सा नहीं माना जाता? क्यों केवल रूढ़िवाद की परिभाषा साड़ी और घूँघट तक सीमित हो जाती है?

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने...

“कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।"

अकरम, शेरखान सहित करीब 12 लोगों ने सरिया, डंडे से तोड़ी कपड़ा व्यापारी वीरेंद्र की टाँग: दुकान बेचकर चले जाने की देते थे धमकी

19 सितंबर 2020 को दोपहर 12 बजे के आसपास वीरेंद्र के कपड़े की दुकान में घुस कर उन पर हमला बोला गया। यह हमला उनकी दुकान के पास कपड़े की ही दुकान करने वाले अकरम, शेर खान और आशु समेत 10-12 लोगों ने किया।

‘बलात्कारी अब्बा’ पर पुलिस कार्रवाई में बजरंग दल ने की बेटियों की मदद, भड़का कन्हैया कुमार का यार जीशान

लड़कियाँ बजरंग दल से पहले अपने गाँव वालों को और रिश्ते में एक भाई को यह सब बातें बता चुकी थीं। मगर, कहीं उनकी सुनवाई नहीं हुई तो कहीं कहा गया, “जो अब्बा कह रहे हैं उसको मानो।”

‘एक बार दिखा दे बस’: वीडियो कॉल पर अपनी बेटियों से प्राइवेट पार्ट दिखाने को बोलता था मोहम्मद मोहफिज, आज भेजा गया जेल

आरोपित की बेटी का कहना है कि उनका घर में सोना भी दूभर हो गया था। उनका पिता कभी भी उनके कपड़ों में हाथ डाल देता था और शारीरिक संबंध स्थापित करने की कोशिश करता था।

बॉलीवुड की ‘गंदगी’ घर-घर तक पहुँचाकर आखिर ‘भोजपुरी इंडस्ट्री’ को नंगा नाच करने वाला क्यों कहा जा रहा है?

कला के नाम पर यदि भोजपुरी फिल्मों में 'नंगा नाच' होता है, तो ​बॉलीवुड की फिल्मों में क्या होता है?

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