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फरवरी के बाद भी पाक रहेगा FATF की ग्रे लिस्ट में, निकलने की उम्मीद नहीं: पाकिस्तानी मंत्री

फरवरी, 2020 के बाद भी पाकिस्तान का इस ग्रे लिस्ट से निकलना मुश्किल लग रहा है। इसका कारण मुख्यतः इस आतंकी देश की रिस्क प्रोफाइल को बताया गया है, यानि अन्य सदस्य देशों को डर है कि इस लिस्ट में से निकलते ही पाकिस्तान मनी लॉन्ड्रिंग कर जिहादियों को पैसा देना फिर से शुरू कर देगा।

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कार्रवाई समूह (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स, एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट में से निकलने की पाकिस्तान की राह मुश्किल से और मुश्किल होती जा रही है। यहाँ तक कि अब तो उसके खुद के नेतृत्व और प्रशासन को यह लगने लगा है कि फ़िलहाल फरवरी 2020 तक ग्रे लिस्ट में डाला गया उनका देश उसके बाद भी ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं निकल पाएगा।

पाकिस्तान के अखबार डॉन में पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री हम्माद अज़हर के हवाले से यह बयान प्रकाशित हुआ है कि फरवरी, 2020 के बाद भी पाकिस्तान का इस ग्रे लिस्ट से निकलना मुश्किल लग रहा है। इसका कारण मुख्यतः इस आतंकी देश की रिस्क प्रोफाइल को बताया गया है, यानि यह खतरा और अन्य सदस्य देशों को डर, है कि इस लिस्ट में से निकलते ही पाकिस्तान मनी लॉन्ड्रिंग कर जिहादियों को पैसा देना फिर से शुरू कर देगा।

पाकिस्तान को जून, 2019 में पेरिस स्थित इस संस्था ने अपनी ग्रे लिस्ट में डाला था। इसके बाद उसे एक एक्शन प्लान दिया गया था, जिसके हिसाब से पिछले महीने (अक्टूबर 2019) तक पाकिस्तान को काले धन के जिहादियों के हाथ में पहुँचने पर नियंत्रण करके दिखाना था। ऐसा न करने पर उसके नार्थ कोरिया और ईरान की तरह ब्लैक लिस्ट में चले जाने का खतरा था।

ऐसा न करने के बाद भी पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में एफएटीएफ ने डाला नहीं था, और ग्रे लिस्ट में बनाए रखा था। और अब पाकिस्तान के मंत्री यह रोना रो रहे हैं कि कुछ अन्य देशों को एफएटीएफ के नियमों का केवल 80 प्रतिशत अनुपालन पर छूट दे दी गई, जबकि पाकिस्तान को यह इजाज़त नहीं मिल रही है। पाकिस्तान पर नियमों का 100 फीसदी अनुपालन करने के लिए दबाव बनाया जाना पाकिस्तानी मंत्री को बहुत बुरा लग रहा है

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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