डिजिटल क्रांति ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। प्रगति के बीच एक गंभीर चिंता भी जन्म ले रही है: क्या हम तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, या उसके मानसिक गुलाम बनते जा रहे हैं?
आज के युग में क्यों प्रासंगिक हैं अहिल्याबाई होल्कर? आज जब राजनीति, प्रशासन और धर्म - तीनों में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, तब अहिल्याबाई जैसी विभूतियाँ प्रेरणा देती हैं कि ईमानदारी, त्याग और सेवा भाव से भी शासन चलाया जा सकता है।