पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) इन दिनों बड़े उथल-पुथल से गुजर रहा है। वहाँ आम नागरिक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्रदर्शनकारी पुलिस और सेना से भिड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार भी दमनकारी कदम उठाने में पीछे नहीं हट रही। मामला लोगों के मौलिक अधिकारों और लंबे समय से चले आ रहे भेदभाव से जुड़ा है।
कैसे भड़की प्रदर्शन की आग
बीते सोमवार (29 अक्तूबर 2025) को मुजफ्फराबाद में बड़े पैमाने पर झड़प हुई। यहाँ जम्मू कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने अपने 38 सूत्रीय माँगपत्र को लेकर बंद और चक्का जाम का आह्वान किया था।
इसी दौरान मुस्लिम कांफ्रेंस पार्टी की ओर से एक शांति रैली निकाली गई। आरोप है कि इस रैली में शामिल लोगों ने JKJAAC के प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई। गोली लगने से 30 साल के दुकानदार मोहम्मद सुद्दीर की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए।
हालात बिगड़ने की वजह
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 70 साल से PoK की जनता को सिर्फ वादे मिले हैं, हक नहीं। सबसे बड़ी नाराजगी 12 ऐसी विधानसभा सीटों को लेकर है, जो पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं।
स्थानीय लोग मानते हैं कि इससे उनकी राजनीतिक भागीदारी घट जाती है और असली प्रतिनिधित्व खत्म हो जाता है। इसके अलावा महंगाई, भ्रष्टाचार, बिजली और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें भी गुस्से की बड़ी वजह हैं।
प्रदर्शनकारियों का जवाब
पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने मंगलवार (30 सितम्बर 2025) सुबह कई जगह बड़े-बड़े कंटेनर लगाकर रास्ते बंद कर दिए, ताकि प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ पाएँ। लेकिन गुस्साए लोगों ने इन कंटेनरों को मिलकर नदी में धकेल दिया।
Video: PoK Protests Intensify On Day 2, Civilians Toss Containers Into River – My Story on @NDTV. https://t.co/jZmLxBl69E
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) September 30, 2025
यह दृश्य सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बना रहा। जगह-जगह प्रदर्शनकारी पुलिस पर पथराव करते दिखे। कई लोग लाठियों से लैस होकर नारेबाजी कर रहे थे।
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज़ मीर ने साफ चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान सरकार ने उनकी माँगें नहीं मानीं तो आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने कहा, “हमारा अभियान जनता के हक़ों के लिए है। अब या तो सरकार माँगें पूरी करे, वरना जनता के गुस्से का सामना करने के लिए तैयार रहे।”
सरकार की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान सरकार ने हालात को काबू करने के लिए PoK के कई इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात कर दिए हैं। लगभग 100 अतिरिक्त सैनिक भेजे गए हैं। साथ ही इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बंद कर दी गई हैं, ताकि लोगों के बीच संदेश न फैल सके।
प्रदर्शन का फैलाव
ये विरोध सिर्फ मुज़फ्फराबाद तक सीमित नहीं है। रावलाकोट, हजीरा, अब्बासपुर, पानीओला और तर्खेल जैसे कई कस्बों में भी लोग धरने और जुलूस निकाल रहे हैं। विदेशों में बसे कश्मीरी भी इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं। ब्रिटेन में लंदन स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन और ब्रैडफोर्ड काउंसलेट के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुए।
ब्रिटेन में हुए प्रदर्शनों में जम्मू-कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायंस के अध्यक्ष महमूद कश्मीरी ने कहा, “PoK की जनता को इंसाफ, बराबरी और गरिमा चाहिए, न कि गोलियाँ और आँसू गैस। अगर पाकिस्तान ने दमन किया तो हम दुनिया भर में सबसे बड़ा प्रवासी प्रदर्शन करेंगे और इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाएँगे।”
गुस्सा और भरोसा दोनों टूटा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पाकिस्तान के नेता खुद ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं, जबकि आम जनता महँगाई और बेरोजगारी से त्रस्त है। भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है।
बुधवार (1 अक्तूबर 2025) को शौकत नवाज़ मीर ने PoK के अलग-अलग जिलों से एक लंबे मार्च का ऐलान किया है, जो मुज़फ्फराबाद तक पहुँचेगा। इससे पहले भी उन्होंने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा था कि कुछ ताकतें जानबूझकर हालात को 9 मई जैसे दंगों की ओर ले जाना चाहती हैं।

