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हर दिन नई माँग, हर जवाब पर नई शर्त: राहुल गाँधी ने प्रोटेस्ट के नाम पर शुरू किया प्रोपेगेंडा, अपने ‘पेपर लीक’ इतिहास का दे पाओगे जवाब?

छात्रों के समर्थन में राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी माँग रखी। इसमें पीएम मोदी के माफी माँगने और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग शामिल है। ये वही कॉन्ग्रेस है जिसके राज में कई पेपर लीक हुए, लेकिन न तो उन्होंने माफी माँगी और न ही किसी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने सरकार के सामने तीन माँगें रखी हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा, दिल्ली में छात्रों के साथ मारपीट के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और जवाबदेही तय हो और पीएम मोदी छात्रों से माँगी माँगें। राहुल गाँधी के इन माँगों में अंतिम दोनों माँग 22 जुलाई 2026 के प्रेस कॉन्ग्रेस में जुड़ गए हैं।

इससे पहले जब वे 21 जुलाई को पीएम आवास के सामने धरने पर बैठे थे तो उन्होंने दो माँगे रखी थीं। संसद में पेपर लीक पर चर्चा करने की माँग तो सरकार ने तुरंत मान ली थी। इसके बाद फिर दूसरी शर्त उन्होंने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का जोड़ दिया था। इस पर आज भी अड़े दिखे। लेकिन संसद में पेपर लीक को लेकर उनकी माँग नई फेहरिस्त से गायब दिखी। हालाँकि जब उनसे पूछा गया कि संसद में चर्चा के लिए सरकार राजी है तो उन्होंने कहा कि किस अनुच्छेद के अंतर्गत चर्चा होगी, इस पर विवाद है।

उन्होंने ये भी कहा कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से पेपर लीक मुद्दे पर बात की थी, लेकिन स्पीकर ने कहा कि वे सरकार से पूछ कर बताएँगे, लेकिन वे अब तक नहीं बता पाए हैं। दरअसल संसद की कार्यवाही लगातार बाधित रही है। विपक्ष ने पेपर लीक पर सदन में चर्चा और स्थगन प्रस्ताव की माँग की है, साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा माँगा है। छात्रों के साथ मारपीट का मुद्दा भी उठाया है। सरकार पहले से ही पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष नियमों के तहत चर्चा न कर लगातार हंगामा कर रहा है और कार्यवाही बाधित कर रहा है। इसलिए विपक्ष को संजीदा होने की जरूरत है, ताकि सदन चल सके और चर्चा हो सके।

राहुल गाँधी चाहते हैं कि पेपर लीक और छात्रों के साथ मारपीट के लिए प्रधानमंत्री मोदी माफी माँगें। ये वही कॉन्ग्रेस है जो आज तक आपातकाल के दौरान नेताओं को जेलों में ठूसने और जनता के मूलभूत अधिकारों को छीनने के लिए माफी नहीं माँगी है।

आपातकाल लगाने वाली राहुल गाँधी की दादी इंदिरा गाँधी ही थीं, इसके लिए कॉन्ग्रेस या गाँधी परिवार ने कभी कुछ नहीं कहा। इतना ही नहीं इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए सिख दंगों में जिस तरह से सिखों का कत्लेआम किया गया, उसके लिए राहुल गाँधी ने कभी माफी नहीं माँगी।

जनता पर व्यापक बर्बरता करने वाली कॉन्ग्रेस आज प्रधानमंत्री से माफी की उम्मीद करती है और वह भी उस आंदोलन के लिए जिसमें छात्रों के नाम पर मुँह पर रुमाल बाँधे पुलिसवालों पर हमला करने वाले अराजक तत्व मौजूद थे। इनलोगों ने छात्र आंदोलन को बदनाम ही किया है।

संसद सत्र जब शुरू हो रहा हो और संसद मार्च की इजाजत इन्हें कोई सरकार नहीं दे सकती। सत्र के दौरान पूरे देश के प्रतिनिधि या यूँ कहें कि पूरा लीडरशिप, चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, वहाँ मौजूद रहता है। ऐसे में इनकी सुरक्षा को ताक पर नहीं रखा जा सकता।

10 सालों में 156 पेपर लीक हुए- राहुल गाँधी

राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि पिछले 10 सालों में 152 पेपर लीक हुए और इनमें से एक में भी सजा नहीं मिली। इससे करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों का ग्रुप देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर रहा है और छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

लेकिन 2014 से पहले 2004 तक की बात करें तो कॉन्ग्रेस के शासनकाल में राष्ट्रीय और राज्य स्तर की कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे। इस दौरान 2004 का CBSE PMT, 2006 का AIIMS PG और 2011 की AIEEE परीक्षा, 2009 में हरियाणा शिक्षक भर्ती पेपर लीक, 2011 में यूपीपीसीएस पेपर लीक, 2012 में 6 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए उसमें एम्स एमबीबीएस, रेलवे ग्रुप डी, तमिलनाडु पीएससी शामिल थे लेकिन कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई।

आज NEET के माध्यम से सभी राज्यों और केन्द्र के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन होता है, लेकिन उस वक्त हर राज्य और केन्द्र की परीक्षा अलग अलग होती थी और इनके पेपर लीक होते थे। मध्य प्रदेश का बहुचर्चित व्यापम घोटाला भी 2008-2013 के बीच हुआ था। इतने घोटालों के बाद भी कभी किसी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया। किसी प्रधानमंत्री ने देश से माफी नहीं माँगी और न ही छात्रों से माफी माँगी।

इतना ही नहीं अगर राहुल गाँधी को राजस्थान में पेपर लीक को लेकर प्रियंका गाँधी ने क्या कहा था, जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी, उसे भी सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक पूरे देश की समस्या है। राजस्थान में इसे रोकने की कोशिश की। सीएम गहलोत ने भी की लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।

राहुल गाँधी ने पीएम आवास के सामने धरना देने और हिरासत में लिए जाने की घटना को दरकिनार करने की कोशिश की। हालाँकि उन्होंने इस दौरान उनके मुँह से खून निकलने का जिक्र किया। लेकिन ये नहीं बताया कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर जमावड़ा लगाने की कोशिश क्या कॉन्ग्रेस के जमाने में कभी हुई थी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का ये धरना क्या लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ नहीं है?

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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