अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांति पुरस्कार पर फिर एक बड़ा झटका लगा है। हमास के बड़े नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे ट्रंप के नए 20-सूत्री शांति प्रस्ताव को खारिज कर देंगे। ट्रंप ने यह प्रस्ताव गाजा युद्ध को खत्म करने के लिए पेश किया था। हमास ने इस योजना को ‘इजरायल के हितों को पूरा करने वाला’ बताया है। हमास का कहना है कि इस प्रस्ताव में फिलिस्तीनी लोगों की मुख्य माँगें पूरी तरह नजरअंदाज की गई हैं।
यह खबर तब आई है जब कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने हमास को कड़ी चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि उनके पास इस डील को मानने के लिए केवल ‘तीन या चार दिन‘ हैं। ट्रंप ने कहा था कि अगर डील नहीं मानी गई, तो कड़े नतीजे भुगतने होंगे और सैन्य कार्रवाई तेज की जाएगी। इस फैसले से नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की ट्रंप की उम्मीदों को भी झटका लगा है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में हमास के सैन्य प्रमुख ने युद्धविराम की शर्तों पर आपत्ति जताई है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि हमास के लड़ाकू गुट इस योजना के खिलाफ हैं। यह प्रस्ताव अमेरिका ने सोमवार को जारी किया था। इसका नाम ‘गाजा संघर्ष खत्म करने की व्यापक योजना‘ था।
इस योजना को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत समर्थन दिया है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई और तुर्की जैसे कई मुस्लिम और अरब देशों ने भी इसका समर्थन किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दुनिया के कई अन्य नेताओं ने भी इस योजना को समर्थन दिया है। हालाँकि, हमास की आपत्ति से यह साफ हो गया है कि इसे लागू करना आसान नहीं होगा।
तुरंत युद्ध विराम और हमास से सत्ता छीनने का प्रस्ताव
इस शांति प्रस्ताव में कुछ अहम बातें रखी गई हैं। सबसे पहली बात यह है कि तुरंत युद्ध विराम (Ceasefire) होना चाहिए। हमास को अपने पास बचे हुए सभी बंधकों को 72 घंटों के अंदर छोड़ना होगा। इसके बदले में, इजरायली सेना गाजा के कुछ हिस्सों से धीरे-धीरे वापस हट जाएगी। प्रस्ताव में यह भी तय किया गया है कि हमास का सैन्य गुट अपने हथियार छोड़ देगा। साथ ही, हमास को भविष्य में गाजा के शासन में कोई जगह नहीं मिलेगी।
इस योजना में गाजा को दोबारा बनाने का भी रास्ता है, जिसके लिए दूसरे देश पैसा देंगे। यह प्रस्ताव लंबे समय में एक फिलिस्तीनी देश बनाने की बात भी करता है। हालाँकि, उस देश की सीमाएँ और आजादी से जुड़ी जरूरी बातें अभी साफ नहीं बताई गई हैं।
हमास ने शांति योजना को बताया ‘असंतुलित’, कहा- ये तो बस इजरायल की माँग
हमास के एक बड़े नेता ने इस शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उन्होंने कतर से BBC को खास बातचीत में बताया कि यह योजना संतुलित नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘यह प्लान फिलिस्तीनी लोगों के हितों को नजरअंदाज करता है।’ नेता ने साफ कहा कि इस योजना में कुछ भी नया नहीं है। यह सिर्फ वही बातें हैं जो इजरायल पहले से ही माँग रहा है।
इस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बात की, क्योंकि मामला बहुत नाजुक है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में हमास को हथियार छोड़ने और भविष्य के शासन से बाहर रखने की बात है। उनके अनुसार, यह सीधे-सीधे आत्मसमर्पण करने जैसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस प्लान में गाजा की नाकेबंदी या इजरायल के कब्जे जैसे बड़े मुद्दों पर कोई बात क्यों नहीं की गई है।
हमास में फूट? शांति समझौते को लेकर नेता आपस में बँटे, बंधकों पर कंट्रोल नहीं
‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ की एक रिपोर्ट बताती है कि हमास के नेताओं के बीच आपसी फूट पड़ गई है। कुछ नेता शांति प्रस्ताव में बदलाव के लिए तैयार हैं। वे चाहते हैं कि हथियार छोड़ने (Disarmament) वाली शर्त को थोड़ा नरम किया जाए। वहीं, कुछ कट्टरपंथी नेता इस समझौते को मंजूर करने को संघर्ष के साथ धोखा मान रहे हैं।
फिलिस्तीनी सूत्रों का कहना है कि हमास ने जवाब फाइनल करने के लिए ‘दो या तीन दिन’ का समय माँगा है। वे कतर, मिस्र और तुर्की जैसे देशों के बिचौलियों से बात कर रहे हैं। इन बिचौलियों ने हमास से जोर देकर कहा है कि वे इस मौके को हाथ से न जाने दें। ऐसा करने से गाजा में और बर्बादी रोकी जा सकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जो गुट शांति समझौते के लिए सहमत होना चाहता है, बंधकों पर उसका नियंत्रण नहीं है। इसीलिए इस मामले में उनकी बात कम सुनी जा रही है।
शांति समझौता हुआ तो… हमास की ताकत खत्म और गाजा पर उसका राज भी खत्म
एक बिचौलिए ने रॉयटर्स न्यूज एजेंसी से बात करते हुए बताया कि इस शांति समझौते में बहुत कुछ दाँव पर लगा है। उन्होंने कहा, “अगर यह डील होती है, तो हमास की फौज की ताकत खत्म हो जाएगी। साथ ही, गाजा पर उसका राजनीतिक राज भी खत्म हो जाएगा।” बिचौलिए ने साफ किया कि इससे यह पक्का हो जाएगा कि गाजा कभी भी इजरायल के लिए चुनौती नहीं बन पाएगा।

ट्रंप की सीधी चेतावनी: हमास ने प्रस्ताव नहीं माना तो ‘भुगतना पड़ेगा’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात की। उन्होंने अपनी समय सीमा पर फिर से जोर दिया। ट्रंप ने हमास को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन्होंने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया, तो उनके नेताओं के लिए ‘नर्क’ जैसी स्थिति होगी। उन्होंने कहा कि इससे गाजा के लोगों का दुख और बढ़ जाएगा। ट्रंप ने दावा किया कि इस योजना को अब जोर मिल रहा है। ट्रंप ने कहा, “इजरायल सहमत है, अरब देश सहमत हैं। अब हमास को भी सहमत होना होगा, या फिर नतीजे भुगतने होंगे।”
इस योजना को यूरोप के नेताओं का भी समर्थन मिला है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसका स्वागत किया। उन्होंने इसे शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। हालाँकि, उन्होंने यह सावधान भी किया कि स्थायी शांति के लिए फिलिस्तीनी देश के मुद्दे को और मजबूती से उठाना होगा।
गाजा में बढ़ा तनाव: इजरायल ने घेराबंदी कसी, हमास ने मना किया तो और तेज होगा युद्ध
गाजा में जमीन पर तनाव काफी बढ़ गया है। इजरायल के रक्षा मंत्री ने गाजा शहर के आस-पास ‘घेराबंदी और मजबूत’ करने का आदेश दिया है। उन्होंने वहाँ के नागरिकों से उत्तरी इलाकों को खाली करने को कहा है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि अगर शांति वार्ता टूटती है, तो वहाँ बड़ा सैन्य ऑपरेशन हो सकता है।
यह युद्ध अब अपने दूसरे साल में पहुँच गया है और कई इजरायली लोग अभी भी हमास के पास बंधक हैं। इस समय अगर हमास इस शांति प्रस्ताव को खारिज करता है, तो डोनाल्ड ट्रंप जिसे ‘ऐतिहासिक सफलता’ बता रहे हैं, वह पूरी तरह नाकाम हो सकती है। अगर हमास शांति समझौते को मना करता है, तो इसका मतलब होगा कि इजरायल गाजा पट्टी में अपनी सैन्य कार्रवाई को जारी रखेगा और वह और तेज भी हो सकती है।

