बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने रविवार (05 अक्टूबर 2025) को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान चुनाव आयोग ने बिहार में सफल मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) पर 90, 270 BLO को सम्मानित किया। चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव में शुरू होने जा रही नई पहलों के बारे में भी जानकारी दी।
इस मौके पर CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार का ये चुनाव पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बनने जा रहा है। इस चुनाव में जो नई पहले शुरू की जाएँगी वो आने वाले सभी चुनाव में लागू होंगी। ज्ञानेश कुमार ने भोजपुरी भाषा में बिहार की जनता का SIR में योगदान देने के लिए धन्यवाद भी किया।
चुनाव आयोग ने मतदान से पहले, मतदान और मतगणना में की गई 17 नई पहलों के बारे में बताते हुए कहा कि यह पहली बार हुआ जब चुनाव से कुछ महीने पहले ही बूथ लेवल अफसर और एजेंट्स की ट्रेनिंग दिल्ली में संपन्न हुई है। मानसिक और नैतिक तौर पर बढ़ावा देने के लिए BLO, ERO का भत्ता बढ़ाया गया।
चुनाव आयोग ने कहा कि पहले वोटर ID मिलने में देरी होती थी लेकिन अब SIR की फाइनल लिस्ट बनते ही 15 दिन में वोटर ID दे दी जाएगी। साथ ही इस ID में साफ कलर फोटो और बड़े अक्षरों में सीरियल नंबर भी लिखा जाएगा।
अब हर बूथ पर केवल 1200 मतदाता होंगे, जिससे लंबी-लंबी कतार लगाने की समस्या खत्म होगी। इन मतदाताओं को बूथ के बाहर ही मोबाइल जमा करना होगा और वोट कास्ट करने के बाद वापस ले जा सकते हैं। इसके अलावा प्रत्याशी अब बूथ के 100 मीटर के भीतर ही अपना पोलिंग बूथ लगा सकते हैं।
इसके अलावा चुनाव आयोग ने मॉक पोल में राजनीतिक दलों को पोलिंग एजेंट्स समय से भेजने का आग्रह किया है। साथ ही अब हर पोलिंग बूथ पर 100 प्रतिशत वेब कास्टिंग होगी।
चुनाव से पहले SIR कराना कानूनी प्रक्रिया है: ECI
चुनाव से ठीक पहले SIR प्रक्रिया कराने के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा कि ये पूरी तरीके से सही कानूनी प्रक्रिया है। किसी का यह कहना है कि रिवीजन चुनाव के बाद होना चाहिए वो न्याय संगत नहीं है।
आयोग ने कहा कि SIR में गड़बड़ी ठीक कर ली गई हैं। इसके लिए 1 अगस्त 2025 से 1 सितंबर 2025 तक दावे और आपत्ति भरने के लिए तारीख दी गई थी। चुनाव आयोग ने बताया कि कुछ दावे आए भी तो सिर्फ नाम हटाने के लिए क्योंकि मतदाता जागरूक हो गया है कि उसका नाम एक से ज्यादा विधानसभा में नहीं होना चाहिए।
इनमें 3.6 लाख नाम कटे है और ये सभी मतदाता अयोग्य हैं। आयोग ने कहा कि अगर अब भी किसी राजनीतिक दल को लगता है कि कोई योग्य मतदाता सूची में छूट गया है तो वो नोमिनेशन फाइल कराने से पहले दावा और आपत्ति अपील कर सकता है। ERO के नेतृत्व में इसका निस्तारण किया जाएगा।
आधार कार्ड नागरिकता का सबूत नहीं: ECI
चुनाव आयोग ने बताया कि आधार कार्ड नागरिकता प्रमाण नहीं है। CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा, “INUMERATION form में ही चुनाव आयोग ने आधार कार्ड माँगा था। आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं, ऑप्शनल है। आधार कार्ड, आधार एक्ट के तहत भी न तो जहाँ आप रहते है उसका प्रमाण और न नागरिकता का प्रमाण। अगर आपने किसी ने भी 2023 के बाद आधार बनवाया हो तो आधार कार्ड स्वयं यह भी कहता है कि आधार कार्ड जन्म तिथि का प्रमाण नहीं है।”

