बिहार में मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ी की शिकायत करने वालों को चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में करारा जवाब दिया है। चुनाव आयोग ने कोर्ट में कहा कि उन्हें बिहार के मतदाताओं से अब तक SIR में गड़बड़ी की कोई शिकायत नहीं मिली हैं, केवल दिल्ली में बैठे राजनीतिक दल और NGO को इससे परेशानी है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग की ओर से वकील राकेश द्विवेदी ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी बताया कि याचिकाकर्ताओं ने सितंबर 2025 में प्रकाशित अंतिम सूची को चुनौती नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट में मामले को लेकर सुनवाई
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट मंगलवार (07 अक्टूबर 2025) को उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चुनाव आयोग से अंतिम सूची से हटाए गए 3.66 लाख मतदाताओं के नामों और उसमें शामिल किए गए 21 लाख मतदाताओं के नामों की सूची प्रकाशित किए जाने की माँग की गई थी। मामले की अगली सुनवाई 09 अक्टूबर 2025 को तय की गई है।
लाइव एंड लॉक की रिपोर्ट के मुताबिक, भूषण ने कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाताओं के नाम हटाने का कारण नहीं बताया है और ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित करने के बाद हटाए गए 3.66 लाख मतदाताओं का कारण नहीं बताया है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि हटाए गए मतदाता अपील दायर क्यों नहीं कर रहे हैं?
इस पर याचिकार्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कारण जाने बिना मतदाता अपील दायर नहीं कर सकते हैं। साथ ही हटाए गए नामों की कोई सूची प्रकाशित नहीं की गई है।
इस दलील का विरोध करते हुए EC के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि हटाए गए मतदाताओं को सूचित किया जा चुका है। इस दलील का विरोध करते हुए EC के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि हटाए गए मतदाताओं को सूचित किया जा चुका है और जोड़े गए मतदाताओं की लिस्ट पर कहा कि ये ज्यादातर नए मतदाता हैं।
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात को लेकर कुछ भ्रम है कि अंतिम मतदाता सूची में जोड़े गए मतदाता उन मतदाताओं की सूची से हैं, जिन्हें पहले ड्राफ्ट सूची से हटा दिया गया था या बिल्कुल नए नाम हैं।

