लोवर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जमानत नहीं मिलने के बाद अब उमर खालिद ने एक बार फिर से विक्टिव कार्ड खेला है। उमर खालिद ने दिल्ली के कोर्ट में दावा किया है कि उसकी जैसी भूमिका अन्य लोगों की भी थी, लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया, सिर्फ उसे पकड़ा गया। उमर खालिद के वकील ने कहा कि चार्जशीट में कई अन्य अहम नाम हैं, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने गवाह बना लिया, जबकि वो ‘पाप’ में समान रूप से भागीदार थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद ने गुरुवार (9 अक्टूबर 2025) को कोर्ट में कहा कि दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे (2020) की बड़ी साजिश के मामले में पुलिस ने उसे चुनिंदा तरीके से आरोपित बनाया। दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में जस्टिस समीर बजपेई के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पाइस ने उमर खालिद की ओर से दलीलें दीं। वकील ने कहा, “कई लोग मेरी तरह ही स्थिति में हैं, हमारे रोल में कोई खास अंतर नहीं है, फिर भी सिर्फ मुझे आरोपित बनाया गया।”
वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पाइस ने दिल्ली पुलिस के कुछ सुरक्षित गवाहों के बयानों का हवाला दिया और कहा कि इनमें ऐसा कुछ नहीं है जो यूएपीए (UAPA) या किसी अन्य गंभीर अपराध को साबित करे।
एक गवाह के अनुसार, 8 दिसंबर 2019 को जंगपुरा में हुई एक बैठक में उमर खालिद के साथ योगेंद्र यादव, नदीम खान और अन्य लोग मौजूद थे। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पाइस ने तर्क दिया कि “योगेंद्र यादव ने खुद इस एफआईआर पर एक लेख लिखा और पूछा कि मुझे ही आरोपित क्यों बनाया गया? जो उन्होंने या नदीम खान ने किया, वही मैंने किया तो फर्क क्या है?”
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस इस घटना को साजिश का हिस्सा बता रही है, लेकिन उन्हीं लोगों को आरोपित नहीं बनाया गया जिनकी भूमिका समान या बड़ी बताई गई है।
एक अन्य गवाह ताहिरा दाऊद के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उमर खालिद ने मुस्लिम छात्रों के साथ देशभर में रैली करने की बात की थी। पाइस ने कहा, “इसमें आतंकवाद जैसा कुछ नहीं है।”
इसके अलावा, गवाह परवेज आलम का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जंगपुरा की बैठक में सभी को समान या बड़ी भूमिकाएँ दी गई थीं, फिर भी केवल खालिद को आरोपित बनाया गया।
पाइस ने यह भी कहा कि राहुल रॉय और सबा दिवान, जिन्होंने दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) बनाया था, उन्हें भी आरोपित नहीं बनाया गया, जबकि गवाहों के बयान में कहा गया कि सबा दिवान ही अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारियाँ सौंपती थीं, न कि उमर खालिद।
“उमर खालिद को कोई काम नहीं दिया गया, तो उनकी भूमिका दूसरों से ज्यादा या कम कैसे मानी गई?”
अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2025 को होगी। गौरतलब है कि उमर खालिद की ओर से पहले भी इसी तरह की दलीलें अदालत में दी जा चुकी हैं, जिनमें उसने खुद को निर्दोष बताया। कई बार वो ये कह कर बचने की कोशिश करता रहा कि दिल्ली दंगों के समय वो दिल्ली में था ही नहीं। हालाँकि कोर्ट उसकी दलीलों को खारिज कर चुका है और ये माना है कि दिल्ली में न होना, उसके निर्दोष होने की गारंटी नहीं है। उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं।
हिंसा में उमर खालिद की भूमिका
इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 सितम्बर को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
जस्टिस नवीन चावला और शालिंदर कौर की खंडपीठ ने कहा था कि प्रथमदृष्टया (prima facie) ऐसे सबूत मौजूद हैं जो दिखाते हैं कि दोनों ने प्रदर्शनों की योजना और लोगों को उकसाने में भूमिका निभाई, जिससे आगे चलकर दंगे भड़के।
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर नहीं जा रही, लेकिन अन्य आरोपितों को दी गई जमानत के आधार पर इन दोनों को राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि उनकी भूमिका अलग और गंभीर बताई गई है।
हाई कोर्ट ने कहा कि खालिद और इमाम के भाषणों की भूमिका अहम है और जब इन्हें अन्य साक्ष्यों के साथ देखा जाता है, तो यह सिर्फ सामान्य राजनीतिक अभिव्यक्ति नहीं लगती।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि “शरजील इमाम और उमर खालिद इस पूरी साजिश के बौद्धिक सूत्रधार (intellectual architects) थे, जिन्होंने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर योजना बनाई।”
जाफराबाद इलाके की जाँच में यह भी सामने आया कि एक वामपंथी संगठन ‘पिंजरा तोड़ ग्रुप’ ने इलाके में हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई थी। दिल्ली पुलिस ने नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को गिरफ्तार किया था। दोनों 2015 में बने ‘पिंजरा तोड़’ समूह की संस्थापक सदस्य हैं और ‘इंडिया अगेंस्ट हेट’ संगठन तथा उमर खालिद से जुड़े बताए गए।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्राँच ने 6 मार्च 2020 को दर्ज एफआईआर में कहा था कि 24 से 26 फरवरी 2020 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान हुए दंगे पहले से रचे गए (pre-planned) थे।
एफआईआर के अनुसार, एक मुखबिर ने बताया कि उमर खालिद और उनके सहयोगियों ने दो संगठनों के साथ मिलकर साजिश रची और इसके तहत खालिद ने दो जगहों पर भड़काऊ भाषण दिए, जिनमें उन्होंने लोगों से ट्रंप की यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरने की अपील की ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को अल्पसंख्यकों के खिलाफ दिखाया जा सके।
इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग बेघर हुए। अदालत ने कहा कि जाँच के दस्तावेज और साक्ष्य सुनियोजित साजिश की ओर संकेत करते हैं, इसलिए उमर खालिद और शरजील इमाम को फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती।

