मिस्र में गाजा शांति पर हुए एक सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी की खुलकर तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि भारत एक महान देश है, जिसका नेतृत्व उनका एक ‘बहुत अच्छा दोस्त’ कर रहा है। इसी मंच पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप को भारत-पाक के बीच हुए युद्धविराम का पूरा श्रेय दिया, यहाँ तक कि युद्ध टलने का भी।
हालाँकि, भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि 10 मई 2025 का यह युद्धविराम सिर्फ दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की आपसी बातचीत का नतीजा था, इसमें किसी बाहरी शक्ति का कोई हस्तक्षेप नहीं था।
#WATCH | Egypt | US President Donald Trump says, "India is a great country with a very good friend of mine at the top and he has done a fantastic job. I think that Pakistan and India are going to live very nicely together…"
— ANI (@ANI) October 13, 2025
(Video source: The White House/YouTube) pic.twitter.com/rROPW57GCO
ट्रम्प ने की भारत की तारीफ
मिस्र में गाजा शांति सम्मेलन सोमवार (13 अक्टूबर 2025) को आयोजित हुआ। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने संबोधन में भारत की प्रशंसा की। इसके अलावा, ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर भी उम्मीद जताई और कहा, “मुझे लगता है कि पाकिस्तान और भारत साथ मिलकर बहुत अच्छे से रहेंगे।” यह कहते हुए ट्रंप ने पीछे खड़े पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर मुस्कुराते हुए इशारा किया और पूछा, “ये इसे संभव बनाने में मदद करेंगे, है ना?”
शहबाज शरीफ का बयान
ट्रंप द्वारा आमंत्रित किए जाने पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का श्रेय सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति को दे दिया। शहबाज शरीफ ने कहा कि अगर ट्रंप और उनकी टीम ने तनाव के उन चार दिनों में दखल नहीं दिया होता, तो दोनों देशों के बीच युद्ध एक ऐसे स्तर तक बढ़ सकता था जहाँ शायद कोई भी जिंदा नहीं बचता। इस तरह शहबाज शरीफ ने युद्ध टालने के लिए ट्रंप की मध्यस्थता को पूरी तरह स्वीकार किया।
ट्रंप का लगातार दावा और भारत का खंडन
ट्रंप पहले भी कई बार दावा कर चुके हैं कि 10 मई 2025 को हुआ भारत-पाकिस्तान सीजफायर उनके दखल से संभव हुआ था। उन्होंने इसे इजरायल की संसद (नेसेट) में दिए गए भाषण में भी अपने सुलझाए गए आठ बड़े विवादों में से एक बताया। भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि यह सीजफायर दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) की सीधी बातचीत से हुआ था, और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।

