दिल्ली ब्लास्ट केस की जाँच में गिरफ्तार आरोपितों से हुई पूछताछ ने पूरे मॉड्यूल की वर्षों पुरानी आतंकी साजिश की परतें खोल दी हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस मॉड्यूल ने 2021 से कम से कम छह भारतीय शहरों में एक साथ हमले करने की योजना बनाई थी। अब फरीदाबाद से गिरफ्तार शाहीन सईद की डायरी से यह भी सामने आया है कि ‘बाबरी मस्जिद’ का बदला लेने के लिए 6 दिसंबर को विभिन्न शहरों में हमला करने की तैयारी थी।
डिजिटल सबूत, शाहीन सईद की डायरी और नोट्स बताते हैं कि यह योजना 2021 से आगे बढ़ाई जा रही थी। अधिकारियों का कहना है कि ‘D6 मिशन’ के तहत जैश के आतंकियों ने देश के छह शहरों को दहलाने की साजिश रची थी। जाँच अधिकारियों ने इस मामले शाहीन सईद को एक महत्वपूर्ण एसेट बताया है।
तुर्किये में ‘ग्रीन सिग्नल’ और ‘D-6 मिशन’ की डायरी
जाँच में पता चला है कि मार्च 2022 में मॉड्यूल के सदस्य तुर्किये गए, जहाँ उनकी मुलाकात ISI के हैंडलर अबू उकाशा से हुई, जो जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के विदेशी ऑपरेशंस का एक अहम चेहरा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह बैठक 6 दिसंबर के समन्वित हमले की औपचारिक मंजूरी थी, जिससे कई सालों से चल रही योजना अचानक तेज हो गई।
जब्त की गई डायरी और नोट्स में ‘D-6 मिशन’ का जिक्र मिलता है, इसमें टारगेट चुनने, नए लोगों को जोड़ने, पैसों की आवाजाही और सुरक्षित कम्युनिकेशन के तरीकों का ब्योरा है। इन दस्तावेजों में तीन अहम ऑपरेटिवों डॉ मुजम्मिल, उमर और डॉ शाहीन सईद के रोल विस्तार से दर्ज हैं, जो 2021 से एक संगठित मॉड्यूल की तरह काम कर रहे थे।
2010 से 2025 तक का पूरा चक्र
अधिकारियों के अनुसार मॉड्यूल की कहानी 2010 में शुरू होती है, जब शुरुआती रैडिकलाइजेशन हुआ। 2015–2016 में ये लोग JeM से गहरे तौर पर जुड़ गए। 2021 में हमलों की स्ट्रक्चर्ड प्लानिंग शुरू हुई और 2025 में ब्लास्ट के बाद इनका भागने का प्रयास सामने आया।
फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ शाहीन सईद को एजेंसियाँ इस पूरी साजिश की केंद्रीय कड़ी मान रही हैं। अन्य आरोपित उसे ‘मैडम सर्जन’ कहते थे, उसकी मेडिकल विशेषज्ञता और अहम भूमिका की वजह से। अधिकारियों का कहना है कि शाहीन को विदेश में बसने का सपना दिखाकर धीरे-धीरे रैडिकलाइज किया गया और पाकिस्तान समर्थित हैंडलरों ने उसे ‘मिशन’ का हिस्सा बना लिया।
दिल्ली ब्लास्ट के बाद शाहीन ने अक्टूबर 2025 में नया पासपोर्ट बनवाकर विदेश भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस वेरिफिकेशन में देरी होने से योजना विफल हो गई। सर्विलांस रिपोर्ट बताती है कि ब्लास्ट के बाद उसने धीरे-धीरे अपने संपर्क खत्म करने शुरू कर दिए थे।
परिवार और अतीत से जुड़ी जानकारी
एक अधिकारी ने बताया कि 2021 तक शाहीन का विचारधारात्मक बदलाव साफ दिखने लगा था। एक रिश्तेदार ने जब उससे नौकरी, शादी और परिवार छोड़ने की वजह पूछी, तो उसने कहा, “मैंने अपने लिए बहुत जी लिया। अब अपने कौम का कर्ज चुकाने का समय है।”
कानपुर के GSVM मेडिकल कॉलेज के एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि शाहीन का रुझान 2010 के आसपास बदलना शुरू हुआ, जब वह विदेश में रहने वाले एक भारतीय मूल के डॉक्टर के संपर्क में आई, जिसने उसे कट्टरपंथी वीडियो और किताब भेजे। इसके बाद उसने हिजाब पहनना शुरू किया और बार-बार विदेश जाने की इच्छा जाहिर करती रही।
फंडिंग और हथियारों का इंतजाम
जाँच में सामने आया है कि 2022 तक मॉड्यूल हथियार इकट्ठा कर चुका था। एजेंसियों ने करीब 20 लाख रुपए की हवाला फंडिंग का पता लगाया है, जो एक JeM हैंडलर की ओर से उमर, मुजम्मिल और शाहीन के लिए भेजी गई थी। माना जा रहा है कि यह पैसा भर्ती, सुरक्षित ठिकाने, रेकी और कम्युनिकेशन डिवाइसेज पर खर्च हुआ।
क्रॉस-बॉर्डर कम्युनिकेशन की डिटेल अब फोरेंसिक तरीके से खंगाली जा रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क को समझा जा सके।

