बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमाँ खान कमाल को सोमवार (17 नवंबर 2025) को मौत की सजा सुनाई है। ICT ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी माना है और 2024 में छात्र विद्रोह पर कार्रवाई का आदेश देने को लेकर सजा सुनाई गई है। इसके आलावा भी बांग्लादेश में हसीना के खिलाफ सैकड़ों केस दर्ज हैं।
बांग्लादेश के ‘द डेली स्टार’ के मुताबिक, हसीना के खिलाफ पूरे बांग्लादेश में 663 केस दर्ज हैं। बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट के एक वकील के हवाले से बांग्लादेशी मीडिया ने बताया है कि हसीना के खिलाफ पुलिस थानों में दर्ज मामले उचित प्रक्रिया के तहत जारी रहेंगे। उन्होंने कहा, “हसीना की अनुपस्थिति में भी मुकदमे चलते रहेंगे। मामले तभी खारिज किए जाते हैं जब आरोपी की मौत हो जाती है।”
ICT ने शेख हसीना के खिलाफ 5 आरोपों की सुनवाई की थी जिसके बाद उन्हें सभी में दोषी माना गया और उनमें से 2 में मौत की सजा सुनाई गई। हसीना को जिन दो मामलो में मौत की सजा सुनाई गई उनमें एक ढाका के चंखरपुल में 6 प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या करने से जुड़ा था। वहीं, एक अन्य मामले में उन्हें अशुलिया में 6 छात्र प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश देने का दोषी माना गया।
शेख हसीना ने ICT के फैसले के बाद 5 पेज का बयान जारी किया है। शेख हसीना ने कहा कि यह फैसला पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित था। शेख हसीना ने कहा है, “मौत की सजा अंतरिम सरकार का अवामी लीग (हसीना की पार्टी) को एक राजनीतिक ताकत के रूप में अमान्य करने का तरीका है।”
हालाँकि, बांग्लादेश की कट्टरपंथी सरकार हसीना के बयान से भी घबराई हुई है और नहीं चाहती है कि आम लोगों तक हसीना की बात भी पहुँचे। ‘द डेली स्टार’ के मुताबिक, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (NCSA) ने सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑनलाइन समाचार आउटलेट्स से राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए जोखिम का हवाला देते हुए शेख हसीना के बयानों को ना दिखाने को कहा है।
NCSA ने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ मीडिया आउटलेट दोषी ठहराए गईं शेख हसीना के बयान दिखा रहे हैं। यानी पहले तो बांग्लादेश में हसीना की गैर मौजूदगी में उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और अब उनका पक्ष भी एजेंसियाँ लोगों तक नहीं पहुँचने देना चाह रही हैं।

