2008 के सीरियल ब्लास्ट में शामिल आतंकी का निकला अल-फलाह से कनेक्शन: सुरक्षा एजेंसियाँ जाँच में जुटीं, खुलासा- विस्फोटक बनाने के लिए हो रहा था यूनिवर्सिटी से चुराए केमिकल का इस्तेमाल

दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए ब्लास्ट की जाँच में एक ‘व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल’ सामने आया है। इसमें यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों और प्रोफेसरों के शामिल होने का शक है। जाँच एजेंसियों को फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की लैब के रिकॉर्ड में बड़ी गड़बड़ी मिली है।

माना जा रहा है कि लैब के केमिकल्स और सामान को विस्फोटक बनाने के लिए चुराया गया था। यह नेटवर्क पाकिस्तानी हैंडलर से ट्रेनिंग लेता था। NIA अब यूनिवर्सिटी से जुड़े कई लोगों से पूछताछ कर रही है। जाँच में 3,118 किलो विस्फोटक बरामद हुए हैं और यह भी पता चला है कि इस मॉड्यूल ने जम्मू-कश्मीर के अस्पतालों को हथियार डिपो बनाने की कोशिश की थी।

पुराने आतंकी नेटवर्क से जुड़े तार

जाँच में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पुराने आतंकी लिंक भी सामने आए हैं। 2008 के सीरियल ब्लास्ट का भगोड़ा आतंकी मिर्जा शादाब बैग भी यहीं का छात्र था। अब 10 नवंबर के ब्लास्ट में भी यूनिवर्सिटी के फैकल्टी और पूर्व छात्रों का नाम आने से शक गहरा गया है कि यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल आतंकी भर्ती या कट्टरपंथी बनाने के लिए किया जा रहा है। NIA इस पूरे मामले की गहराई से जाँच कर रही है।

यूनिवर्सिटी की लैब से चोरी हुए केमिकल्स

जाँच में पता चला है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी की लैब से लगातार सामान चोरी हो रहा था। लैब रिकॉर्ड में दर्ज सामान और असल में इस्तेमाल हुए सामान में भारी अंतर है। शक है कि डॉक्टर्स और प्रोफेसरों ने पढ़ाई के नाम पर केमिकल्स और शीशे के सामान को छोटी मात्रा में बाहर निकाला। यह चोरी विस्फोटक बनाने के लिए की गई थी। अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे काम के पीछे बहुत पढ़ा-लिखा और वैज्ञानिक दिमाग वाला नेटवर्क है।

डॉक्टरों से पूछताछ और विदेशी कनेक्शन

NIA अब यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसरों और डॉक्टरों, जिनमें डॉ मुजम्मिल अहमद गनई भी शामिल है, उनसे पूछताछ कर रही है। एजेंसी जानना चाहती है कि विस्फोटक बनाने के लिए केमिकल्स किसने चुने और बनाने की प्रक्रिया किसने तय की।

जाँच में पता चला है कि डॉ मुजम्मिल को एक पाकिस्तानी जैश-ए-मोहम्मद हैंडलर ने एक एन्क्रिप्टेड ऐप पर 42 बम बनाने के वीडियो भेजे थे। डॉ मुजम्मिल ने यूरिया पीसकर विस्फोटक बनाने के लिए आटा चक्की जैसी चीजों का इस्तेमाल किया था। उनकी जगहों से 3,118 किलो विस्फोटक भी बरामद हुआ है।

अस्पतालों को हथियार डिपो बनाने की साजिश

सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इस आतंकी समूह ने जम्मू-कश्मीर के अस्पतालों को हथियारों का भंडार बनाने की योजना बनाई थी। एजेंसियाँ इसकी जाँच कर रही हैं। गांदरबल और कुपवाड़ा जिलों के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में लॉकरों की जाँच की गई है। इसका मकसद अस्पतालों का इस्तेमाल विस्फोटक छिपाने के लिए होने से रोकना है।