अरुणाचल की महिला का पासपोर्ट अवैध बता चीन ने एयरपोर्ट पर 18 घंटे तक भूखा-प्यासा रखा, AP को बताया अपना हिस्सा: भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध, कहा- ये बेतुकी बात है

अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली एक भारतीय महिला को शंघाई एयरपोर्ट पर 18 घंटे तक रोक कर परेशान किया गया। वह लंदन से जापान जा रही थीं और शंघाई में उनकी 3 घंटे की ट्रांजिट थी। चीन के अधिकारियों ने उनके भारतीय पासपोर्ट को ‘अमान्य’ बताया क्योंकि उसमें जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश लिखा था। अधिकारियों ने यहाँ तक कहा कि अरुणाचल चीन का हिस्सा है, इसलिए महिला को चीनी पासपोर्ट लेना चाहिए। इस घटना के बाद भारत ने चीन से सख्त विरोध दर्ज कराया है।

ब्रिटेन से यात्रा और उत्पीड़न की शुरुआत

जानकारी के अनुसार, 30 साल की प्रेमा थोंगडोक पिछले 14 सालों से ब्रिटेन में रहती हैं और वित्तीय सलाहकार के तौर पर काम करती हैं। 21 नवंबर को वह लंदन से जापान जा रही थीं। शंघाई एयरपोर्ट पर सुरक्षा जाँच के दौरान उन्हें अलग कर दिया गया।

एक अधिकारी ने उनके पासपोर्ट की ओर इशारा किया, जिस पर अरुणाचल प्रदेश जन्मस्थान के रूप में दर्ज था। महिला ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें 18 घंटे तक रोके रखा, उन्हें खाना नहीं दिया और न ही जापान जाने दिया। उन्हें सिर्फ भारत या ब्रिटेन वापस जाने को कहा गया।

भारतीय दूतावास की मदद और अगला कदम

कई घंटे बाद प्रेमा थोंगडोक ने किसी तरह अपने दोस्तों के जरिए शंघाई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क किया। इसके बाद दूतावास के छह अधिकारी तुरंत एयरपोर्ट पहुँचे और उन्हें खाना भी दिया।

हालाँकि, अधिकारी उन्हें जापान की यात्रा जारी रखने देने के लिए चीन को मना नहीं पाए। आखिरकार, महिला ने थाईलैंड के रास्ते भारत की फ्लाइट बुक की और अब वहीं से अपना काम कर रही हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय को ईमेल लिखकर इस उत्पीड़न की जानकारी दी है।

भारत ने चीन से किया कड़ा विरोध

इस घटना को लेकर भारत ने चीन के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने चीन से कहा है कि यात्री को ‘बेतुके आधार’ पर रोका गया, जबकि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और वहाँ के निवासियों को भारतीय पासपोर्ट पर यात्रा करने का पूरा हक है।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि चीन का यह कदम नागरिक उड्डयन (सिविल एविएशन) से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। भारत ने जोर देकर कहा कि इस तरह की हरकतें दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों में बाधा डालती हैं।