‘मैं चाहे कहीं भी धरना दूँ या माँगे बदल दूँ- मेरी मर्जी’: राहुल गाँधी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा और अखिलेश यादव अपने समर्थकों के साथ पीएम आवास के नजदीक अकबर रोड के सामने धरना प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान माँगे माने जाने के बाद नई माँग रख दी और कहा कि उनकी मर्जी वो चाहे जो भी माँग रखें या कहीं भी धरना दें। इससे पता चलता है कि राहुल गाँधी पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर कितने संजीदा हैं।

राहुल गाँधी से बात करने पहुँचे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दुख जताते हुए कहा है कि राहुल गाँधी की माँग माने जाने के बाद उन्होंने धरना खत्म करने के बजाए तुरंत दूसरी माँग सरकार के सामने रख दी। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी जैसे वरिष्ठ नेता इतनी जल्दी अपनी बात से पीछे हट रहे हैं, ये दुर्भाग्यपूर्ण है और लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है।

राहुल गाँधी की माँग को लेकर क्या कहा मंत्री जितेन्द्र सिंह ने

जितेन्द्र सिंह ने X पर पोस्ट कर बताया है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने अपनी पहली माँग माने जाने के बाद तुरंत नई माँग रख दी।

उन्होंने लिखा, “सरकार ने मुझे और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन जी को इन वरिष्ठ नेताओं से बात करने के लिए खुद मौके पर भेजा था। राहुल गाँधी से धरना प्रदर्शन खत्म करने का अनुरोध किया गया, क्योंकि यह जगह विरोध प्रदर्शनों के लिए नहीं है और यहाँ धरना देने से आम जनता को बहुत परेशानी हो रही है।”

राहुल गाँधी ने क्या माँग रखी थी

कॉन्ग्रेस नेता ने माँग रखी थी कि अगर सरकार संसद में NEET से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हो जाती है, तो वह तुरंत अपना धरना खत्म कर देंगे। इस पर सरकार तुरंत मान गई और राहुल गाँधी को भरोसा दिलाया गया कि उनकी माँग मान ली गई है और सरकार NEET और उससे जुड़े आंदोलन पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है यानी कॉकरोच जनता पार्टी के इस धरने प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर भी सरकार बात करने को तैयार थी जो नीट पेपर लीक के नाम पर दिल्ली में हुड़दंग कर रहे हैं।

अपनी बात से पलटे राहुल गाँधी

केन्द्रीय मंत्री के मुताबिक, राहुल गाँधी को जब यह बात बताई गई तो उन्होंने कहा कि वह इतने पर ही नहीं मानेंगे। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग भी कर डाली। राहुल गाँधी ने कहा कि अब मेरी दो मांगे हैं- संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।

इस पर जब उनको याद दिलाया गया कि पहले उन्होने केवल चर्चा की ही माँग की थी, तब राहुल गाँधी ने कहा कि अब उनकी माँगें बदल गई हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की माँग इतनी जल्दी कैसे बदल सकती है, जब उनको विनम्रता से ये समझाने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि ये उनकी मर्जी है।

राहुल गाँधी से बात कर रहे गृहसचिव ने उन्हें कहा कि यहाँ धरना प्रदर्शन करना सही नहीं है और इससे दिक्क्त होगी तो उन्होंने कहा कि उनकी मर्जी है वे चाहे जहाँ बैठें। अब राहुल गाँधी को कौन ये समझाए कि धरना प्रदर्शन और लोगों के जमावड़े के लिए पुलिस से इजाजत लेनी पड़ती है। प्रधानमंत्री के घर के नजदीक का इलाका सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील है और पुलिस यहाँ धरना- प्रदर्शन की इजाजत नहीं दे सकती। फिर इन्होंने तो पुलिस ने इजाजत लेने की जहमत भी नहीं उठाई थी।

सरकार NEET और उससे संबंधित आंदोलन के साथ जुड़े हर विषयों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है। जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी ने आज तक इस गंभीर विषय पर नियमानुसार औपचारिक चर्चा करने का कोई नोटिस नहीं दिया है। ऐसे में राहुल गाँधी को अचानक धरना देने की क्या सुझी। दरअसल पलटूराम का व्यवहार लोकतंत्र के उसूलों से मेल नहीं खाता है।

वैसे भी जब विपक्ष के सारे नेता कॉकरोच जनता पार्टी को समर्थन देने के नाम पर जंतर मंतर पर एक के बाद एक आने लगे, तो अब तक इस आंदोलन से दूरी बना कर रखे राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी को क्रेडिट का टेंशन होने लगा। वैसे भी आम आदमी पार्टी के नेता 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल होकर बैरिकेट्स फाँद चुके थे।

ऐसे में राहुल गाँधी को भी कुछ अलग करने की सुझी और उन्होने बहन और सांसद प्रियंका के साथ पीएम आवास के बाहर ही धरने पर बैठ गए। उनका साथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे भी दे रहे थे। लेकिन माँग तो पहले सोच लेते, आखिर नीट जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा संसद में करने के बजाए सड़क पर सांसदों को धरना देने की क्या जरूरत थी, वह भी तब जब संसद सत्र चल रहा हो।

सरकार नीट के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए भी तैयार हैं। भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक अपनी माँग में पहले ही कह चुके हैं कि वे सांसदों से मिलकर अपनी बात संसद में उठाना चाहते हैं। अगर उन्हें आश्वासन मिले तो वो अपना आमरण अनशन खत्म कर सकते हैं। ऐसे में सांसदों का इस तरह का व्यवहार समझ के परे है।