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पूजा पाल से लेकर रोली-ऋचा तक… जब-जब सपा के शीर्ष नेतृत्व पर उठाए सवाल, तब-तब अखिलेश के पाले गुंडों ने गैर-यादव महिला नेताओं के चरित्र पर किया वार

मुलायम सिंह यादव का वह दौर तो सबने देखा था जब उन्होंने बलात्कारियों का यह कहकर बचाव किया था कि 'लड़के हैं, लड़कों से गलती हो जाती है।' आज उनके बेटे अखिलेश यादव ने उस सोच को डिजिटल रूप दे दिया है।

समाजवादी पार्टी (सपा) खुद को ‘लोहियावादी’ और ‘सामाजिक न्याय’ का पैरोकार कहती नहीं थकती। लेकिन जब बात महिलाओं के सम्मान और पार्टी के भीतर उनके आत्मसम्मान की आती है, तो इस दल का असली और बेहद खौफनाक चेहरा सामने आ जाता है। सपा का एक पुराना और ढर्रे वाला इतिहास रहा है, जहाँ महिलाओं को केवल एक राजनीतिक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

यदि कोई महिला नेता, चाहे वह पार्टी के भीतर हो या बाहर, सपा की नीतियों, उनके नेताओं की हरकतों या किसी खास वर्ग के वर्चस्व पर सवाल उठाने की जुर्रत कर दे, तो पार्टी का पूरा तंत्र और उनके पाले हुए गुंडे-मवाली उस महिला के चरित्र हनन पर उतारू हो जाते हैं।

चाहे वह पूजा पाल हों, रोली तिवारी मिश्रा हों या फिर ऋचा राजपूत (लोधी), इन सभी महिलाओं ने जब-जब सपा के शीर्ष नेतृत्व से तीखे सवाल किए, तब-तब इन्हें जवाब में गालियाँ, धमकियाँ और बेहद अभद्र ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।

समाजवादी पार्टी के भीतर गैर-यादव समाज और महिलाओं के लिए भाषा का जो स्तर अपनाया जाता है, वह इतना ओछा और शर्मनाक है कि कोई भी सभ्य समाज इसे स्वीकार नहीं कर सकता। पार्टी छोड़ने के बाद या पार्टी में रहते हुए आवाज उठाने वाली महिलाओं को किस तरह गंदे ढंग से निशाना बनाया जाता है।

पूजा पाल का सीधा सवाल: ‘सपा में सिर्फ सैफई परिवार, अतीक-मुख्तार और आजम का ही भविष्य’

ताजा विवाद सिराथू से विधायक पूजा पाल के एक राजनीतिक सवाल के बाद शुरू हुआ, जिसने सपा के जातिवादी और संकीर्ण दायरे पर सीधी चोट की। पूजा पाल ने अखिलेश यादव को टैग करते हुए एक X पर पोस्ट किया, “श्री अखिलेश यादव जी, आप पूछ रहे थे कि मुझे क्या मिला? आज आपके प्रश्न का जवाब देती हूँ। अखिलेश जी, मुझे गर्व है कि मैं पाल समाज की बेटी हूँ और भाजपाई हूँ। मैं उस पार्टी में हूँ जहाँ चाय वाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है। ये मेरी क्षमता पर निर्भर करता है। अखिलेश जी, मैं उस पार्टी में हूँ, जहाँ पाल समाज का बेटा या बेटी विधायक, सांसद, मंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है। सपा में अतीक, मुख्तार, आजम और सैफई परिवार के अलावा किसी का कोई भविष्य न पहले कभी था और ना होगा।”

इस पोस्ट के बाद सपा के जातिवादी ट्रोल्स ने पूजा पाल के खिलाफ मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं। एक पिछड़े समाज की बेटी ने जब योग्यता और हिस्सेदारी पर बात की, तो सपा कुनबा उनके चरित्र और जाति पर हमला करने लगा। यह दिखाता है कि सपा में गैर-यादव समाज के नेताओं को सिर्फ एक सीमा तक ही बर्दाश्त किया जाता है।

रोली तिवारी मिश्रा: ‘सपा में राजनीति करनी है तो गालियाँ सुनने की आदत डाल लो’

सपा की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ रोली तिवारी मिश्रा ने जब सनातन धर्म और श्रीरामचरितमानस के सम्मान में आवाज उठाई, तो उन्हें पार्टी के भीतर ही प्रताड़ित किया गया। रोली तिवारी को एक गुंडे ने मैसेज में बेहद अभद्र गालियाँ दीं, जिसकी डीपी पर अखिलेश यादव की तस्वीर लगी थी। इस पर रोली ने अखिलेश यादव को घेरते हुए लिखा था, “श्री अखिलेश यादव जी आपकी DP लगाकर किये गए इस गुंडे के मैसेज को ध्यान से पढ़ियेगा और सोंचियेगा ये मैसेज आपकी बेटियों टीना और अदिति को किया गया है फिर बताइयेगा कि आपको कैसा लग रहा है ?? अगर बुरा लगे तो अपनी पार्टी में पल रहे गुंडों पर अंकुश लगाइये। अगर आप की पार्टी के ये गुंडे नहीं सुधरे तो एक दिन आ0 योगी आदित्यनाथ जी इन गुंडों का खात्मा ही कर देंगे। क्या श्रीरामचरितमानस सम्मान यात्रा निकालना इतना बड़ा अपराध हो गया कि धमकी और गालियाँ मिल रही हैं ??”

यही नहीं, रोली तिवारी मिश्रा ने 17 जून के एक ट्वीट में सपा के अंदरूनी कचरे को साफ करते हुए लिखा था कि अखिलेश यादव का एक सलाहकार (जो जाति से ठाकुर है) ही 2016 की लड़ाई का सूत्रधार था। रोली ने बताया कि जब वह राष्ट्रीय प्रवक्ता थीं और उन्हें सपाई हिस्ट्रीशीटर मनुरोजन यादव ने गालियाँ दीं, तो रोली ने एफआईआर (FIR) करने की बात कही। इस पर उन्हें दोटूक और ओछा जवाब मिला था, “सपा में राजनीति करनी है तो अहीरों से र@#$ कहने की आदत डलवा लो पंडिताइन।” यह बयाँ करता है कि सपा के भीतर महिलाओं को किस मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है।

ऋचा राजपूत के खिलाफ सपा के ऑफिशियल हैंडल की अश्लीलता: ‘शूर्पनखा-पूतना’ जैसी अभद्र भाषा

महिला उत्पीड़न और ओछेपन की पराकाष्ठा तब भी देखने को मिली जब समाजवादी पार्टी के ‘आधिकारिक ट्विटर हैंडल’ से डॉ ऋचा राजपूत (लोधी) को खुलेआम अपमानित किया। जिस मनीष जगन अग्रवाल को बचाने के लिए खुद अखिलेश यादव DGP मुख्यालय से लेकर जेल के चक्कर काट रहे थे, उसके समर्थन में सपा के हैंडल से ऋचा राजपूत के खिलाफ बेहद शर्मनाक ट्वीट किए गए।

ऋचा राजपूत को समाजवादी पार्टी के ऑफिश्यिल हैंडल से लिखा, “पूतनाएँ और शूर्पनखाएँ ज्ञान ना दें, वे अपना राक्षसी काम करें जैसा वे करती हैं, अब चल निकल भाग, तुझे सम्मान इज्जत दी वो तुझे हजम नहीं हुई, तू जा, जाकर चिनमयानंद, राम रहीम, सेंगर की सेवा कर, तुझे वहीं सही लड्डू मिलेगा, वही प्रसाद लड्डू जो आश्रम सीरिज में बाबा निकाला खिलाता है।”

समाजवादी पार्टी के हैंडल का दूसरा ट्विट, “दीदी आप बस तो बस चोरी हुई टोंटी, टोंटा नल का जत्था हत्था जो भी हो उसके बारे में बताओ, बकायदा फिटिंग करके संतुष्टिजनक सर्विस मिलेगी, वैसे लगता है भाजपा नेता चिन्मयानंद और कुलदीप सेंगर की स्किल एंड सर्विस से आपकी काफी शिकायतें हैं?”

समाजवादी पार्टी के हैंडल से एक महिला डॉक्टर और नेता के खिलाफ ‘फिटिंग’, ‘संतुष्टिजनक सर्विस’ और ‘विशिष्ट सेवाएँ’ जैसे घिनौने और द्विअर्थी शब्दों का प्रयोग करना यह साफ करता है कि सपा में महिलाओं को लेकर किस कदर की विकृत सोच भरी हुई है।

‘लड़के हैं, गलती हो जाती है’ की विरासत ढोते अखिलेश यादव और उनका डिजिटल गुंडा तंत्र

मुलायम सिंह यादव का वह दौर तो सबने देखा था जब उन्होंने बलात्कारियों का यह कहकर बचाव किया था कि ‘लड़के हैं, लड़कों से गलती हो जाती है।’ आज उनके बेटे अखिलेश यादव ने उस सोच को डिजिटल रूप दे दिया है। जब रोली तिवारी को ‘रं@#$’ सुनने की सलाह दी जाती है, जब ऋचा राजपूत को ‘शूर्पनखा’ कहकर अश्लील तंज कसे जाते हैं, और जब पूजा पाल जैसी पिछड़ी जाति की मजबूत महिला नेता को अपमानित किया जाता है, तब अखिलेश यादव की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ इन गुंडों की पीठ थपथपाती है।

अखिलेश यादव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खुद को कितना भी आधुनिक और प्रगतिशील दिखाने का ढोंग कर लें, लेकिन हकीकत यही है कि उनकी पार्टी आज भी अपराधियों, माफियाओं (अतीक-मुख्तार) और लंपट तत्वों के भरोसे ही सांस ले रही है। जब खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष एक महिला विरोधी ट्रोलर (मनीष जगन) को बचाने के लिए थाने-थाने दौड़ते हैं, तो नीचे के कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ना लाजिमी है।

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