लाखों छात्रों के करियर से जुड़े एक अति संवेदनशील मुद्दे को भटकाने की पूरी कोशिश की गई और इसका राजनीतिक लाभ उठाने के लिए संसद मार्च का आह्वान भी किया गया। सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, और सूत्रों का कहना है कि उनकी भूख हड़ताल जल्द ही समाप्त हो जाएगी।
इस तरह का घटनाक्रम कॉकरोच जनता पार्टी के लिए गंभीर चिंता का विषय है, जिसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति से निर्धारित होतीं।
जब जनता को ‘अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल’ का सहारा लेकर भावनात्मक रूप से प्रभावित करने वाला कोई नहीं बचा, तो अभिजीत दिपके (जो अब तक मौज-मस्ती करते रहे हैं) ने अनुपस्थित कार्यकर्ता के नक्शेकदम पर चलने का फैसला किया है और उन्होंने यह निर्णय तब लिया जब सोशल मीडिया पर उनकी गिरफ्तारी के बारे में झूठ फैलाकर दहशत और घबराहट पैदा करने के प्रयास विफल रहे।
कॉकरोच जनता पार्टी की भड़काऊ बयानबाजी
यह साफ है कि आम आदमी पार्टी (AAP) समर्थित वायरल मार्केटिंग के आधार पर अस्तित्व में आई कॉकरोच जनता पार्टी इस अवसर को हाथ से जाने नहीं देगी। यही वजह है कि समर्थक और नेता अब हिंसा की भाषा बोलने लगे हैं, लेकिन काफी चालाकी से। इसकी शुरुआत अभिजीत दिपके ने कर दी है।

मुख्य न्यायिक समिति के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी रणनीति के तहत जानबूझकर सोनम वांगचुक की ‘गिरफ्तारी’ और अभिजीत दिपके पर हमले के बारे में फर्जी खबरें फैलाईं।
उन्होंने घोषणा की, “दिल्ली पुलिस ने अपना असली रंग दिखा दिया है। अब चुप रहने का समय नहीं है। हमें पूरे भारत में ‘शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन’ शुरू करने की जरूरत है।”
Delhi Police is cracking down at Jantar Mantar. Beating up people and taking away Sonam sir forcefully
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 18, 2026
मुख्य न्यायिक समिति के प्रवक्ता सौरभ दास ने सबसे पहले यह दावा करके जनमानस में दहशत पैदा की कि सोनम वांगचुक को ‘अज्ञात स्थान’ पर ले जाया जा रहा है।
Delhi police has picked up @Wangchuk66 and beaten Dipke.
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) July 18, 2026
Please start peaceful protest in your cities.
This is the most disgusting government in the history of India. pic.twitter.com/QhB03gtHav
इसके बाद उन्होंने समर्थकों से झटपट ‘जंतर मंतर’ पहुँचने का आह्वान किया और दावा किया कि यह भारत और सोनम वांगचुक को ‘बचाने’ की लड़ाई है।
सौरव दास भली-भांति जानते हैं कि हजारों प्रदर्शनकारियों की अचानक भीड़ अशांति पैदा कर सकती है और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ सकती है। भीड़ हिंसा और तोड़फोड़ भी कर सकती है।
लेकिन सीजेपी के प्रवक्ता इसके बजाय लोगों की भावनाओं को भड़काने और बड़ी संख्या में लोगों को लामबंद करने में व्यस्त हैं, उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोगों का जमावड़ा हिंसक भी हो सकता है। ऐसा लगता है कि इसके परिणाम को लेकर उनकी जवाबदेही तो बिल्कुल भी नहीं है।

इन सबके बीच सारा ध्यान (20 जुलाई 2026) सोमवार को प्रस्तावित ‘संसद मार्च’ पर है। मुख्य न्यायाधीश को उम्मीद है कि इस सरकार विरोधी जुलूस में 15 लाख लोग सड़कों पर उतरेंगे।
Everyone should show up at Jantar Mantar immediately! This is a fight to save India! A fight to save Sonam! https://t.co/Lb2IWbBxVg
— Saurav Das (@SauravDassss) July 18, 2026
2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों से भी नहीं सीख रहे ये लोग
हिंसा के अप्रत्यक्ष आह्वान का पैटर्न और रणनीति वैसी ही लगती है, जो 2020 में हुए दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में देखा जा सकता है।
सीएए विरोध प्रदर्शनों की आड़ में, शाहीन बाग की ‘शेरनियों’ ने सड़कों पर धरना दिया, जनजीवन ठप्प कर दिया और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 52 लोगों की जान लेने वाले 2020 के दंगों की नींव रखी।
इस्लामवादियों का जमावड़ा दिसंबर 2019 में ही शुरू हो गया था। उस वक्त जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से संसद तक मार्च निकाला गया था। हालाँकि पुलिस ने इसे नाकाम कर दिया था। शरजील इमाम जैसे भारत विरोधी इस्लामिस्ट भी इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे, जिसमें हिंसा, संपत्ति की तोड़फोड़ और सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुईं।
इस घटना के बाद, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद जामा मस्जिद पहुँचे और भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद विरोध प्रदर्शन पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन किया। शुक्रवार की नमाज के बाद जामा मस्जिद के गेट के अंदर अपने समर्थकों का नेतृत्व करते हुए आजाद को संविधान की प्रस्तावना की एक प्रति और बीआर अंबेडकर के पोस्टर पकड़े हुए देखा गया।
बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, आजाद ने भीड़ को उकसाया था , जिसके कारण दिल्ली गेट के पास हिंसा भड़क गई और एक कार में आग लगा दी गई।
Abhijeet Dipke sits on an indefinite hunger strike.
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 18, 2026
The ‘Chalo Sansad’ march on 20 July will proceed as planned.
‘जय भीम’ के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद अब फिर कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) का समर्थन करते नजर आ रहे हैं।
‘आंदोलनजीवी’ योगेंद्र यादव ने भी सोनम वांगचुक का समर्थन किया। वह सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके को सांत्वना देते हुए देखे गए। दिसंबर 2019 में यादव की मुलाकात शरजील इमाम से उमर खालिद के जरिए हुई थी।

दिल्ली पुलिस द्वारा दायर आरोपपत्र के अनुसार , योगेंद्र यादव, शरजील इमाम और उमर खालिद के बीच यह तय हुआ था कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल मुसलमानों को कट्टरपंथी विचारधारा में ढालने और चक्का जाम के लिए लोगों को लामबंद करने के लिए किया जाएगा। वह सीएबी-जैम नामक एक व्हाट्सएप ग्रुप का भी सदस्य था, जिसने सीएए विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बीच सामंजस्य स्थापित की थी।
Since this morning, this is the fifth time Abhijeet Dipke has pretended to cry.
— Amit Kumar Sindhi (@AMIT_GUJJU) July 18, 2026
The only thing he's upset about is that, in the heat of the moment, he announced that he was going on a hunger strike, but now he's starving.
Junaid bhai's bread pakoras and biryani were his… pic.twitter.com/h7xHwpHwTo
डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के समय हुए दंगों से पहले 10 फरवरी 2020 को इस्लामवादियों ने एक और विरोध मार्च निकाला था। यह मार्च जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से शुरू होकर संसद के सामने समाप्त होना था। बाद में दिल्ली पुलिस ने इसे रोक दिया।
सीजेपी के प्रति अपना समर्थन कॉन्ग्रेस ने पहले ही जता दिया है। उसने सीएए विरोधी प्रदर्शनों को भी याद किया है लोगों के जमावड़े के बारे में भी इशारों-इशारों में बता रही है।
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान नफरत फैलाने वाले भाषण देने के आरोप में कॉन्ग्रेस नेताओं सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग करने वाली याचिका को लेकर दिल्ली पुलिस, राज्य सरकार और केंद्र को नोटिस जारी किया था।
हमने यह भी देखा है कि कैसे खालिस्तानियों ने किसान विरोध प्रदर्शनों की आड़ में 2021 में लाल किले तक मार्च निकाला और भारतीय तिरंगे का अपमान किया ।
इसलिए इस बार सतर्क रहने की जरूरत है। सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाना भी इस दिशा में एक बड़ा कदम है। फिर भी पुलिस और केन्द्र सरकार को पूरी तरह तैयार रहना होगा, ताकि ‘प्रदर्शनकारी’ एक बार फिर राज्य को बंधक न बना सकें।
जो लोग इतिहास से सबक नहीं सीखते, वे उसे दोहराने के लिए अभिशप्त होते हैं। कॉकरोच जैसी जनता पार्टी 20 जुलाई 2026 को एक खतरनाक खेल खेलने जा रही है। दिल्ली को बचाने के लिए इसका विफल होना बेहद जरूरी है।
(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)


