₹7280 करोड़ की PLI योजना से भारत रेयर अर्थ मेटल्स में बनेगा आत्मनिर्भर: 69 लाख टन के भंडार से EV-रक्षा-एयरोस्पेस होंगे मजबूत, REPM का उत्पादन होगा तेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस लक्ष्य पर काम कर रहे हैं कि भारत सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता न रहे, बल्कि उसे बनाने वाला वैश्विक केंद्र बने। मेक इन इंडिया, रक्षा उत्पादन और एयरोस्पेस सेक्टर की तरह अब सरकार रेयर अर्थ मेटल्स में भी आत्मनिर्भर बनने की तैयारी कर रही है। इसी उद्देश्य से सरकार ने 7,280 करोड़ रुपए की PLI स्कीम को मंजूरी दी है, जिससे भारत में इन हाई-टेक धातुओं का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जा सके।

रेयर अर्थ मेटल्स क्या हैं?

रेयर अर्थ मेटल्स वास्तव में 17 विशेष तत्व हैं जो लैंथेनाइड्स ग्रुप में पाए जाते हैं। ये हल्के, चमकीले और तकनीकी उपकरणों में बेहद उपयोगी होते हैं। नियोडाइमियम, यूरोपियम, समेरियम और लैंथेनम इनके प्रमुख उदाहरण हैं। इस समय दुनिया में इनका सबसे बड़ा नियंत्रण चीन के पास है, जो इन धातुओं को लेकर वैश्विक स्तर पर अपना दबदबा बनाए हुए है।

कहाँ होता है इनका इस्तेमाल?

रेयर अर्थ मेटल्स का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस, रक्षा उत्पादन, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, रडार, स्मार्टफोन्स, मेडिकल मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स जैसी हाई-टेक इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में भारत में इनकी माँग मौजूदा स्तर से लगभग दोगुनी होने की संभावना है, जबकि अभी देश इनका बड़ा हिस्सा चीन सहित विदेशी देशों से आयात करता है।

भारत के पास बड़ा भंडार

भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि देश में लगभग 69 लाख टन रेयर अर्थ मेटल्स का अनुमानित भंडार मौजूद है। अभी भारत हर साल करीब 4,000-5,000 टन खपत आयात से पूरी करता है, लेकिन बढ़ती माँग को देखते हुए सरकार चाहती है कि भारत न सिर्फ अपनी जरूरत पूरी करे बल्कि भविष्य में निर्यातक देश भी बने। इसका उद्देश्य वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत करना है।

7,280 करोड़ की PLI योजना

सरकार की यह योजना घरेलू स्तर पर रेयर अर्थ स्थायी चुंबकों (REPM) के उत्पादन को तेज करने के लिए बनाई गई है। इस स्कीम के तहत निर्माण की पूरी प्रक्रिया- खनिज ऑक्साइड से लेकर फाइनल मैग्नेट तैयार होने तक भारत में ही होगी।

सरकार पाँच कंपनियों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत लाइसेंस देगी और लक्ष्य है कि भारत में सालाना 6,000 टन उत्पादन क्षमता विकसित हो सके। इससे EV, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।

यह स्कीम सिर्फ एक औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी में भारत को अग्रणी बनाने की रणनीति है। अगर प्लान सही दिशा में आगे बढ़ा, तो भारत आने वाले वर्षों में रेयर अर्थ मेटल्स के क्षेत्र में दुनिया की नई उभरती शक्ति बन सकता है।