पुलिस से ₹15 लाख हड़पने की कोशिश कर रहे ‘पत्रकार’ को बेंगलुरु पुलिस ने किया अरेस्ट, राहुल गाँधी को अगले PM के तौर पर देखना चाहता था शरथ

बेंगलुरु पुलिस ने शरथ शर्मा कलागुरु नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है, जो खुद को पत्रकार बताकर पुलिस अधिकारियों को ब्लैकमेल कर रहा था। शरथ पर आरोप है कि उसने तीन पुलिस इंस्पेक्टर्स से 15 लाख रुपए की वसूली (उगाही) करने की कोशिश की। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे नहीं मिले, तो वह उनके खिलाफ ड्रग तस्करों से मिले होने की खबर टीवी पर चलवा देगा। फिलहाल पुलिस ने उसे दो दिन की रिमांड पर लिया है।

धमकी और उगाही का खेल

मामले की शुरुआत तब हुई जब शरथ ने सब-इंस्पेक्टर रमेश बंदराडा को फोन किया। उसने दावा किया कि उसके पास कोथनूर, अवलाहल्ली और बागलूरु थानों के तीन इंस्पेक्टर्स के खिलाफ सबूत हैं कि वे ड्रग तस्करों के साथ मिले हुए हैं।

शरथ ने हर इंस्पेक्टर से 5-5 लाख रुपए की माँग की और कहा कि अगर पैसे नहीं दिए, तो वह चैनलों पर खबर चलवाकर उनकी नौकरी खा जाएगा। हैरानी की बात यह है कि कुछ समय बाद वे तीनों इंस्पेक्टर सच में सस्पेंड हो गए, क्योंकि वे अपने इलाके में ड्रग नेटवर्क को रोकने में नाकाम रहे थे।

खुद को बताता था नामी अखबार का पत्रकार

शरथ के पत्रकार होने पर भी पुलिस को शक है। उसके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, वह ‘दैनिक भास्कर’ में काम करता है, लेकिन पुलिस इसकी सच्चाई जाँच रही है। वह सोशल मीडिया पर अपने राजनीतिक विचारों को लेकर भी चर्चा में रहता था।

उसने हाल ही में एक अजीबोगरीब दावा किया था कि देश की राजनीति बदलने वाली है, जिसमें राहुल गाँधी अगले प्रधानमंत्री और अखिलेश यादव गृहमंत्री बनेंगे।

कैसे फँसा ‘फर्जी’ पत्रकार?

शरथ की चालाकी उस समय धरी की धरी रह गई जब सब-इंस्पेक्टर रमेश ने उसके साथ हुई व्हाट्सऐप कॉल्स की रिकॉर्डिंग और मैसेज के स्क्रीनशॉट पुलिस को सौंप दिए। इन्हीं पक्के सबूतों के आधार पर पुलिस ने उस पर धमकी और उगाही का केस दर्ज किया। इस मामले में पुलिस ने ‘BTV कन्नड़’ चैनल के मालिक और एक रिपोर्टर को भी आरोपित बनाया है, जिनसे पूछताछ की जा सकती है।

ड्रग्स केस से जुड़े तार

यह पूरी साजिश कर्नाटक में हुए एक बड़े ड्रग्स ऑपरेशन के बाद रची गई थी, जिसमें करोड़ों की ड्रग्स पकड़ी गई थी। शरथ ने इसी का फायदा उठाकर पुलिसवालों को फँसाने की कोशिश की। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या उसने पहले भी किसी और अधिकारी को इसी तरह डराकर पैसे ऐंठे हैं।