भारत अब वायुसेना (IAF) के लिए फ्रांस से 114 राफेल F4 लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर बातचीत कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों ने इस मेगा डील की प्रमुख शर्तों पर सहमति बना ली है और औपचारिक प्रक्रियाएँ 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक पूरी हो सकती हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है, जो इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील बना सकती है।
क्या है 114 राफेल F4 डील की रूपरेखा
प्रस्तावित समझौते के तहत 114 राफेल लड़ाकू विमानों में से 18 विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में सीधे फ्रांस से खरीदे जाएँगे जबकि बाकी बचे विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इन विमानों में स्टेप बाय स्टेप स्वदेशीकरण बढ़ाया जाएगा, जो 60% तक पहुँच सकता है।
यह मॉडल पहले C-295 परिवहन विमान परियोजना में अपनाया जा चुका है। राफेल के नए वर्जन F4 (F4 स्टार) होगा, जिसमें स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम समेत कुछ भारत-विशेष अपग्रेड शामिल होंगे।
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास मौजूद सभी राफेल F3-R प्लस के नए वर्जन के हैं, जिन्हें इस डील के तहत F4 मानक में अपग्रेड किया जाएगा। भविष्य में इन्हें F5 के नए वर्जन में अपग्रेड करने का विकल्प भी समझौते का हिस्सा होगा।
भारत में निर्माण, रणनीतिक अहमियत और आगे की राह
जानकारी के मुताबिक, राफेल की फाइनल असेंबली लाइन नागपुर स्थित डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में स्थापित की जाएगी, जो अब डसॉल्ट एविएशन की सहायक कंपनी है। यह सुविधा न केवल भारत की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भविष्य में राफेल के वैश्विक ऑर्डर्स के लिए दूसरा मैन्युफैक्चरिंग हब भी बन सकती है।
इस परियोजना में टाटा, महिंद्रा, डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज सहित 30 से अधिक भारतीय कंपनियों के शामिल होने की संभावना है। डसॉल्ट पहले ही भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाएँ स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे भारत को राफेल का वैश्विक मेंटेनेंस हब बनाने की योजना है।
अगर डील 2027 की शुरुआत में साइन होती है, तो पहले 18 राफेल विमानों की डिलीवरी 2030 से शुरू हो सकती है। इस सौदे के पूरा होने के बाद भारत फ्रांस के बाद राफेल का सबसे बड़ा ऑपरेटर बन जाएगा। मौजूदा 36 राफेल और नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए 26 राफेल मरीन विमानों के साथ, भारतीय सशस्त्र बलों में राफेल की कुल संख्या 176 तक पहुँच सकती है।

