राजस्थान कैबिनेट ने ‘डिस्टर्ब एरिया बिल’ को दी मंजूरी, दबाव में प्रॉपर्टी बेचने का खेल खत्म: जानें- कैसे कट्टरपंथियों पर लगेगी लगाम

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘अशांत क्षेत्र (डिस्टर्ब्ड एरिया) बिल’ को मंजूरी दे दी है। अब राज्य के जिन इलाकों को ‘अशांत’ घोषित किया जाएगा, वहाँ अपनी जमीन या मकान बेचने के लिए जिला कलेक्टर से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम सांप्रदायिक तनाव और जबरन प्रॉपर्टी बेचने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है। पहले इसे जयपुर में लागू किया जाएगा और फिर धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।

क्यों पड़ी इस सख्त कानून की जरूरत?

कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि कई इलाकों में आबादी का संतुलन बिगड़ने से तनाव बढ़ रहा था। दंगे या भीड़ की हिंसा जैसी स्थिति बनने पर वहाँ रहने वाले लोग डर के मारे अपनी जायदाद औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हो जाते थे। लोगों की इसी परेशानी को देखते हुए सरकार अब गुजरात की तर्ज पर यह कानून ला रही है, ताकि कोई भी डर या दबाव में अपनी प्रॉपर्टी न बेचे।

कलेक्टर की मंजूरी बिना नहीं बिकेगी प्रॉपर्टी

इस प्रस्तावित कानून के तहत, अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति को अपनी संपत्ति बेचना चाहता है, तो उसे पहले जिला प्रशासन को बताना होगा। कलेक्टर की जाँच समिति यह देखेगी कि लेनदेन आपसी सहमति से हो रहा है या किसी दबाव में। अगर बिना अनुमति के कोई सौदा किया गया, तो उसे कानूनन अमान्य (Cancel) माना जाएगा।

गुजरात मॉडल पर चलेगा राजस्थान

यह कानून नया नहीं है। गुजरात में यह लंबे समय से लागू है और वहाँ इसे ‘डिस्टर्ब एरिया एक्ट’ कहा जाता है। इसके अलावा असम और मणिपुर जैसे राज्यों में भी ऐसे प्रावधान हैं। राजस्थान में इसे ‘प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इम्मूवेबल प्रॉपर्टी’ के नाम से जाना जाएगा। सरकार का दावा है कि इसका मकसद किसी से भेदभाव करना नहीं, बल्कि सामाजिक भाईचारा बनाए रखना और अवैध तरीके से होने वाले प्रॉपर्टी सौदों को रोकना है।