पहली बार गणतंत्र दिवस मना रहे छत्तीसगढ़ के ये 41 गाँव, नक्सल मुक्त अभियान से हुआ परिवर्तन: कभी डर के साए में रहे, अब देशभक्ति से ओतप्रोत हर गली-कूचे

छत्तीसगढ़ में जंगलों के बीच बसे 41 गाँवों में इतिहास बन रहा है। 26 जनवरी 2026 को ये गाँव आजादी के बाद पहली बार पूरे सम्मान और आजादी के साथ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। आजादी के इतने साल बाद पहली बार यहाँ तिरंगा खुलकर लहराता दिख रहा है। जिन जगहों पर कभी डर, सन्नाटा और गोलियों की आवाजे सुनाई देती थीं, वहाँ आज देशभक्ति के गीत और बच्चों की हँसी गूँज रही है।

ये 41 गाँव बस्तर मंडल में आते हैं। इनमें से 13 गाँव बीजापुर जिले में हैं, 18 गाँव नारायणपुर जिले में हैं और 10 गाँव सुकमा जिले में पड़ते हैं। ये सभी गाँव सालों तक माओवादी हिंसा और डर के साए में जीते रहे। यहाँ रहने वाले लोग कभी खुलकर किसी राष्ट्रीय पर्व को मना नहीं पाए। न तिरंगा फहरा पाते थे, न ही बच्चों को यह समझा पाते थे कि गणतंत्र दिवस क्या होता है।

पुलिस और सुरक्षा बलों के नक्सल मुक्त अभियान चलाने से इन इलाकों में अब हालात बदल रहे हैं। सुरक्षा बढ़ने के बाद लोगों में अब भरोसा है। अब लोग बिना डर के बाहर निकलते हैं, सरकारी योजनाओं की बात करते हैं और अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं। जो इलाके कभी सरकार से कटे हुए थे, आज वही इलाके संविधान और लोकतंत्र से जुड़ते नजर आ रहे हैं।

IG सुंदरराज ने बताया कि सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से यह सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पाया है। पिछले वर्ष 13 गाँवों में 15 अगस्त 2025 को पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। अब इन 13 गाँवों सहित कुल 54 गाँव पहली बार गणतंत्र दिवस मनाएँगे।

उन्होंने आगे कहा कि अबूझमाड़, राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र आदि में बसवराजु, के रामचंद्र रेड्डी, सुधाकर, कट्टा सत्यनारायण रेड्डी और अन्य माओवादी कैडर को निष्क्रिय करने से क्षेत्र में चरमपंथी प्रभाव काफी कमजोर हो गया है। नक्सलियों की ताकत और उनके प्रभाव कमजोर होने से भय और धमकी की जगह धीरे-धीरे शांति, विकास और प्रशासनिक संपर्क स्थापित हो रहे हैं।