उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹9.12 लाख करोड़ का ऐतिहासिक बजट पेश किया है। इस बार बजट का सबसे बड़ा हिस्सा आपके और हमारे स्वास्थ्य पर खर्च होगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने ‘स्वस्थ प्रदेश’ का रोडमैप पेश करते हुए चिकित्सा और परिवार कल्याण के लिए ₹37,956 करोड़ दिए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत ज्यादा है। खास बात यह है कि अब गंभीर बीमारियों का इलाज न केवल बेहतर होगा, बल्कि दवाओं की कीमतें कम होने से गरीबों की जेब पर बोझ भी घटेगा।
कैंसर और डायबिटीज का सस्ता इलाज, दवाओं के दाम घटेंगे
सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने का ऐलान किया है। केंद्र के साथ मिलकर प्रदेश सरकार रिबोसिक्लिब जैसी कैंसर की महँगी दवाओं और शुगर के एडवांस इलाज को जनता की पहुँच में लाएगी। इसके अलावा, असाध्य रोगों के मुफ्त इलाज के लिए 130 करोड़ रुपए अलग से रखे गए हैं और लखनऊ स्थित कैंसर संस्थान को 315 करोड़ रुपए दिए गए हैं।
मेडिकल कॉलेजों का जाल और सीटों में बंपर बढ़ोतरी
यूपी अब मेडिकल हब बनने की ओर है। बजट के मुताबिक, प्रदेश में अब कुल 81 मेडिकल कॉलेज (45 सरकारी और 36 निजी) हो गए हैं। 14 नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए 1,023 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
डॉक्टर बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए MBBS सीटें 2017 की 4,540 से बढ़ाकर 12,800 कर दी गई हैं। PG सीटों की संख्या भी 1,221 से बढ़कर 4,995 पहुँच गई है। बाकी बचे 16 जिलों में PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने की तैयारी है।
इमरजेंसी सुविधाएँ और मोबाइल हेल्थ वैन
हादसों के समय ‘गोल्डन आवर’ (शुरुआती कीमती समय) में जान बचाने के लिए सरकार हर जिला अस्पताल में इमरजेंसी एवं ट्रामा सेंटर बनाएगी। वहीं, निर्माण श्रमिकों के लिए पहली बार मोबाइल हेल्थ वैन शुरू की जा रही है। यह वैन सीधे मजदूरों के काम करने वाली जगह पर जाकर उनका फ्री चेकअप करेगी, ताकि उन्हें इलाज के लिए अपनी दिहाड़ी न छोड़नी पड़े।
आयुष्मान भारत और मिशन मोड में योजनाएँ
आयुष्मान भारत मिशन के लिए ₹2,000 करोड़ और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए ₹500 करोड़ दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढाँचे को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को ₹8,641 करोड़ का बड़ा फंड मिला है, जबकि जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के माध्यम से अब गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में पूरी तरह मुफ्त यानी कैशलेस डिलीवरी की सुविधा मिलेगी।
इसके साथ ही, बच्चों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए जापानी इंसेफेलाइटिस और पोलियो (जिसके दायरे में 3.28 करोड़ बच्चे हैं) जैसे गंभीर रोगों के खिलाफ टीकाकरण अभियान को और अधिक प्रभावी और तेज बनाया जाएगा।
आयुष और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस
सरकार केवल एलोपैथी नहीं, बल्कि आयुर्वेद और होम्योपैथी पर भी मेहरबान है। आयुष सेवाओं के लिए 2,867 करोड़ रुपए दिए गए हैं। लखनऊ और पीलीभीत की सरकारी दवा फैक्ट्रियों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। साथ ही, प्रदेश के सभी 75 जिलों में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (Mental Health Program) चलाए जाएँगे।

