बाल विवाह के 95% मामलों में चार्जशीट, किशोर गर्भावस्था में 75% गिरावट: असम में हिमंता सरकार की सख्ती का दिख रहा असर

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार (21 फरवरी 2026) को बताया कि असम में पिछले कुछ सालों में बाल विवाह के मामलों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि 18 साल से कम आयु की लड़कियों से जुड़े बाल विवाह के मामलों में 84 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि 21 साल से कम आयु के लड़कों की शादियों में 91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह उल्लेखनीय कमी राज्य सरकार द्वारा नाबालिग विवाह के खिलाफ चलाए गए व्यापक अभियान और सख्त कार्रवाई के बाद संभव हो पाई है।

असम सरकार के सख्त कार्रवाई का असर

हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह बदलाव तब आया जब राज्य सरकार ने कानून को सख्ती से लागू करने और ठोस कार्रवाई करने का फैसला किया।

उन्होंने लिखा, “हमने कार्रवाई करने का निर्णय लिया और अब फर्क साफ दिखाई दे रहा है। कानून को सख्ती से लागू कर और अपने इरादे स्पष्ट कर हम बचपन की सुरक्षा कर रहे हैं, माताओं को सहयोग दे रहे हैं और दोषियों को जवाबदेह बना रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि बाल विवाह के मामलों में बड़ी गिरावट के साथ-साथ किशोरियों में गर्भधारण के मामलों में भी 75 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने यह भी कहा कि बाल विवाह से जुड़े दर्ज मामलों में से 95 प्रतिशत मामलों में पुलिस पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। सरकार का कहना है कि यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि असम में हर बच्चे की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए वह पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

क्यो गैर-कानूनी है बाल विवाह?

UNICEF के अनुसार, बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणाम होते हैं। 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियाँ घरेलू हिंसा की शिकार होने की अधिक आशंका में रहती हैं और अक्सर अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं। कम उम्र में गर्भधारण से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं।

बाल विवाह लड़कियों को स्कूल छोड़ने पर मजबूर करता है, जिससे उनकी स्थायी आय अर्जित करने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। समय के साथ ये समस्याएँ न सिर्फ परिवारों को प्रभावित करती हैं, बल्कि राज्य के समग्र विकास की गति को भी धीमा कर देती हैं।