पाकिस्तान, आतंकियों के लिए सुरक्षित स्थान है- ये बात एक बार फिर साबित हुई है। अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तानी फौज हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को अपने यहाँ सक्रिय रहने की जगह दे रहा है और उनकी मदद भी कर रहा है। इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे स्थानीय आतंकी संगटनों को भी वैचारिक, रणनीतिक और नेटवर्क आधारित समर्थन पाकिस्तान फौज से प्राप्त है।
रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान के ऐसे रवैये के चलते दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के पहले से अस्थिर हालात और अधिक जटिल हो सकते हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस तरह की गतिविधियाँ ‘गलत आकलन, वैचारिक प्रसार और प्रॉक्सी संघर्ष’ के जोखिम को बढ़ाती हैं, जिससे दोनों क्षेत्रों में नए टकराव और हिंसा की संभावनाएँ बन सकती हैं।
इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान भले ही अंतरराष्ट्रीय दबाव में LeT और JeM पर प्रतिबंध लगाने का दावा करता रहा हो, लेकिन ये संगठन सहयोगी संस्थाओं और फ्रंट संगठनों के जरिए आज भी सक्रिय हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में पाकिस्तान के राजनीतिक और मजहबी मंचों पर हमास प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि उन्हें न केवल प्रचार का अवसर दिया जा रहा है, बल्कि व्यापक नेटवर्क तैयार करने में भी मदद मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि पाकिस्तान की मध्य पूर्व नीति को एक गंभीर जोखिम के रूप में देखा जाए, ताकि दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया में नए प्रॉक्सी संघर्षों और सशस्त्र टकराव को रोका जा सके।

