‘गाँव-गाँव में हो AI का इस्तेमाल’: संकल्प लेकर दिल्ली में हुई दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत, केंद्रीय मंत्री बोले- हम 2047 से पहले बनेंगे विकसित देश

दिल्ली में रविवार (22 फरवरी 2026) को AI और मानवीय मूल्यों के आधार पर दो दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। हाल ही में भारत में अंतरराष्ट्रीय AI समिट भी आयोजित हुआ। उसी दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक विभाग, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ और दीनदयाल उपाध्याय महाविद्यालय ने मिलकर AI के ऊपर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।

सम्मेलन के दौरान इस पर जोर दिया गया कि AI को केवल तकनीक का विषय न मानकर उसे मानवीय और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना समय की माँग है। ‘AI युग में एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का उद्घाटन केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत अब AI की दिशा तय करने वाला देश बन चुका है।

86 देशों ने ऐतिहासिक समझौते पर किए हस्ताक्षर

जितिन प्रसाद ने बताया कि हाल ही में हुए वैश्विक AI समिट में 86 देशों ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते की रूपरेखा तय करती है कि भविष्य की तकनीक पूरी तरह समावेशी होनी चाहिए और मानवीय मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक शुरुआत है। भारत अकेला ऐसा देश है जो तकनीक को संस्कारों के साथ जोड़ना जानता है। यही वजह है कि हम 2047 से पहले ही ‘विकसित भारत’ का सपना साकार कर सकते हैं।”

सिर्फ शहरों तक सीमित न रहे AI

संगोष्ठी में डिजिटल साक्षरता पर जोर देते हुए कहा गया कि AI सिर्फ शहरों और कॉलेजों के छात्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे गाँव-गाँव तक पहुँचना होगा ताकि हर आम आदमी इसकी मदद ले सके। साथ ही डीपफेक और झूठी खबरों जैसी चुनौतियों से सावधान रहने की भी नसीहत दी।

संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रो नारायणलाल गुप्ता जो ABRSM के अध्यक्ष है, उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानव दर्शन’ का जिक्र करते हुए समझाया कि AI महज एक उपकरण है।

इसे भारतीय संस्कारों के अनुरूप ढालना होगा। उन्होंने कहा, “हमें एल्गोरिदम के बहाव में नहीं बहना है। तकनीक हाथ में हो, लेकिन संस्कार हृदय में होने चाहिए। तभी AI मानवता को मजबूत करेगा।”

पहले दिन देश-विदेश के 800 से अधिक शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। 150 से ज्यादा शोध पत्र पढ़े गए। प्रो आनंद रंगनाथन, प्रो के जी सुरेश, प्रो जगदेश कुमार और श्री अतुल जैन जैसे विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में आयोजन में श्री महेन्द्र कपूर, श्रीमती गीता भट्ट और सुनील कश्यप जैसे शिक्षाविदों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।