मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच रूसी तेल आयात को लेकर भारत ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। शनिवार (7 मार्च 2026) को केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत रूसी तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की अनुमति पर निर्भर नहीं है और वह राष्ट्रीय हित में रूस सहित उन सभी देशों से तेल खरीदना जारी रखेगा जहाँ से सबसे प्रतिस्पर्धी और किफायती दरें मिलेंगी। यह बयान अमेरिका द्वारा हाल ही में रूस पर लगे प्रतिबंधों में दी गई 30 दिनों की अस्थायी छूट के बाद आया है।
एनर्जी सप्लाई सुरक्षित, डरने की बात नहीं
सरकार ने विपक्ष के हमलों और वैश्विक तनाव पर जवाब देते हुए कहा कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर चल रहे युद्ध और तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को विविधीकृत (Diversify) करते हुए अब 27 के बजाय 40 देशों से जोड़ लिया है।
#HormuzRoute पर बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर है।
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) March 7, 2026
भारत ने अपने कच्चे तेल के स्रोत 27 से बढ़ाकर 40 देशों तक विविधीकृत किए हैं, जिससे आपूर्ति के कई वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित हुए हैं।
राष्ट्रीय हित में भारत वहीं से तेल खरीदता है जहाँ सबसे प्रतिस्पर्धी… pic.twitter.com/N9Dmy05puz
केंद्र के मुताबिक, भारत के पास वर्तमान में 250 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का रिजर्व है, जो करीब सात से आठ हफ्ते की देश की जरूरत को पूरा करने के लिए काफी है।
रूस बना रहेगा सबसे बड़ा सप्लायर
केंद्र ने पुष्टि की है कि रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहेगा। पिछले तीन वर्षों में अमेरिका और यूरोपीय संघ की आपत्तियों के बावजूद भारत ने अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता दी है।
सरकार ने दो टूक कहा कि एडवांस रिफाइनरी क्षमता के कारण भारत अलग-अलग ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है। अमेरिका द्वारा दी गई छूट पर सरकार ने कहा कि यह कदम वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन भारत का व्यापार हमेशा से निर्बाध जारी रहा है।

