मिडिल ईस्ट जंग से श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 25% बढ़ी, आम लोगों पर बढ़ा महँगाई का बोझ: सरकार कर रही ईंधन की राशनिंग

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव का असर अब छोटे देशों की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में श्रीलंका ने रविवार (22 मार्च 2026) को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 25% तक की बढ़ोतरी कर दी। यह पिछले दो हफ्तों में दूसरी और मार्च की शुरुआत के बाद तीसरी बढ़ोतरी है, जिससे आम लोगों पर सीधा असर पड़ने वाला है।

जंग का असर: तेल महंगा, श्रीलंका पर दबाव

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है। बीते एक हफ्ते में कच्चे तेल के दाम 8% से ज्यादा बढ़े हैं, जबकि एक महीने में 57% तक उछाल देखा गया है।

इसी का असर श्रीलंका पर पड़ा है, जो अपनी ईंधन जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है। देश सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण कोरिया से प्रोसेस्ड पेट्रोलियम उत्पाद मंगाता है, जबकि कच्चा तेल मध्य पूर्व से आता है। कीमतें बढ़ने के बाद सरकार ने ईंधन की खपत कम करने के लिए राशनिंग भी शुरू कर दी है।

जनता पर असर: महंगाई और परिवहन संकट बढ़ा

नई दरों के बाद पेट्रोल 92 ऑक्टेन 317 से बढ़कर 398 रुपए प्रति लीटर और 95 ऑक्टेन 365 से 455 रुपए हो गया है। डीजल की कीमत भी 303 से बढ़कर 382 रुपए प्रति लीटर पहुँच गई है, जबकि सुपर डीजल 443 रुपए तक चला गया है। केरोसिन के दाम में भी 30% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।

इसका सीधा असर परिवहन पर पड़ रहा है। निजी बस ऑपरेटरों ने किराया बढ़ाने की माँग की है और चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं हुआ तो 90% बसें सड़कों से हट सकती हैं। सरकार के मुताबिक बस किराए में 10% से ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। महंगाई भी 5 से 8% तक बढ़ने की आशंका है।

वहीं विपक्ष सरकार पर टैक्स कम करने का दबाव बना रहा है, क्योंकि पेट्रोल पर 119 और डीजल पर 93 रुपए प्रति लीटर टैक्स लगाया जा रहा है। हालाँकि भारत पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।