वैश्विक ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच रविवार (22 मार्च 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उच्च स्तरीय बैठक कर हालात की गहन समीक्षा की। प्रधानमंत्री आवास पर करीब साढ़े तीन घंटे चली इस बैठक में अमित शाह, राजनाथ सिंह और अजीत डोभाल समेत कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में वैश्विक परिस्थितियों के भारत पर संभावित असर, खासकर ऊर्जा, खाद्य और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों का विस्तृत आँकलन किया गया। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने पर जोर दिया गया।
पीएम मोदी ने बैठक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर देते हुए लिखा, “मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के मद्देनजर, उससे निपटने के उपायों की समीक्षा के लिए मैंने CCS की एक बैठक की अध्यक्षता की। हमने अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की।”
Chaired a meeting of the CCS to review the mitigating measures in the wake of the ongoing conflict in West Asia.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 22, 2026
We had extensive discussions on short, medium and long term measures, including ensuring continued availability of fertilisers for farmers, diversifying import… pic.twitter.com/a0SQoGf39e
उन्होंने आगे लिखा, “इनमें किसानों के लिए उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों के लिए आयात के स्रोतों में विविधता लाना, नए गंतव्यों तक निर्यात को बढ़ावा देना और अन्य उपाय शामिल हैं। हम अपने नागरिकों को इस संघर्ष के प्रभावों से सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश में LPG, पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन, खाद्य सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए, ताकि आम नागरिकों को किसी तरह की असुविधा न हो।
तीन स्तरों पर रणनीति: तत्काल से दीर्घकालिक तैयारी
सरकार ने संकट से निपटने के लिए शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। तत्काल जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य में किसी भी संभावित सप्लाई बाधा से निपटने के लिए मजबूत योजना तैयार करने पर सहमति बनी। इसमें ऊर्जा सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन को अधिक लचीला और भरोसेमंद बनाने पर फोकस किया गया।
आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता का आँकलन किया गया। सरकार ने भरोसा जताया कि पहले से बनाए गए भंडार से तत्काल जरूरतें पूरी होंगी, लेकिन भविष्य को देखते हुए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों की पहचान पर भी काम किया जाएगा।
साथ ही केमिकल, फार्मास्युटिकल, पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जरूरी कच्चे माल के आयात में विविधता लाने की योजना बनाई गई, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।
निर्यात, अर्थव्यवस्था और बिजली आपूर्ति पर भी फोकस
बैठक में भारत की समग्र मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति पर भी चर्चा हुई और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि वैश्विक संकट का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम रहे। भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा यह भी बताया गया कि देश के सभी बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार उपलब्ध है, जिससे बिजली आपूर्ति पर किसी तरह का संकट नहीं आएगा। MSME, निर्यात, शिपिंग, व्यापार और वित्त जैसे क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव और उनसे निपटने के उपायों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
इस दौरान कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात और अब तक उठाए गए कदमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि एक विशेष समूह बनाकर ‘Whole of Government Approach’ के तहत सभी मंत्रालय और विभाग मिलकर काम करें और सभी हितधारकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि यह एक तेजी से बदलती वैश्विक स्थिति है और ऐसे समय में सरकार का लक्ष्य है कि देश के नागरिकों पर इसका असर कम से कम हो और आवश्यक जरूरतों की आपूर्ति हर हाल में बनी रहे।

