आपका समर्थन माताओं-बहनों के प्रति दायित्वों को निर्वहन होगा: PM मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सभी दलों से माँगा समर्थन, सदन के नेताओं को लिखा पत्र

देश की संसद में महिलाओं को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी तेज हो गई है। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें आरक्षित करने से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए सरकार सर्वसम्मति बनाने में जुट गई है।

इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर इस महत्वपूर्ण विधेयक को एक स्वर में पारित कराने की अपील की है।

16 अप्रैल से संसद में ऐतिहासिक चर्चा की तैयारी

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा, “16 अप्रैल से देश की संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ी एक ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है। ये विशेष बैठक हमारे लोकतंत्र को और मजबूत बनाने का अवसर है। ये सबको साथ लेकर चलने की हम सभी की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है। इसी भावना और उद्देश्य से मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूँ।”

उन्होंने यह भी लिखा कि कोई भी समाज तभी आगे बढ़ता है जब महिलाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने का अवसर मिलता है। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे इस संशोधन को पारित कराने के लिए एकजुट होकर अपनी भूमिका निभाएँ।

सर्वसम्मति से कानून पास कराने की अपील

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में 2023 में इस विधेयक के पारित होने का जिक्र करते हुए लिखा कि उस समय सभी दलों के सांसदों ने एकजुट होकर इसका समर्थन किया था और इसे जल्द लागू करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों से चर्चा और गहन मंथन के बाद अब यह तय हुआ है कि इसे पूरी भावना के साथ लागू किया जाए।

उन्होंने लिखा, “मैं यह पत्र इसलिए लिख रहा हूँ ताकि हम सभी एक स्वर में इस संशोधन को पारित कराने के लिए एकजुट हों। यह अवसर किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है। यह नारी शक्ति और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी है।”

पत्र के अंत में उन्होंने सांसदों से इस ऐतिहासिक मौके को हाथ से न जाने देने की अपील करते हुए कहा कि महिलाओं के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का यह एक बड़ा अवसर है, जिसे मिलकर सफल बनाना चाहिए।

PM मोदी ने पत्र में लिखा, “अब समय आ गया है कि यह अधिनियम अपनी पूर्ण भावना के साथ देश में लागू हो। यह उचित होगा कि 2029 का लोकसभा चुनाव और सभी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण को पूरी तरह लागू करने के बाद हों। इससे भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा।”

2029 से लागू करने की तैयारी, सीटें भी बढ़ेंगी

सरकार की योजना के अनुसार, इस संशोधन के बाद महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले सभी विधानसभा चुनावों से लागू किया जाएगा। इसके लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 किए जाने का प्रस्ताव है और नई सीटों के अनुसार परिसीमन भी किया जाएगा।

खास बात यह है कि पहले इस कानून को 2034 से लागू करने की चर्चा थी, लेकिन अब 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर इसे 2029 से ही लागू करने की तैयारी है। जिन राज्यों में केवल एक सीट है, वहाँ हर तीसरे चुनाव में महिला आरक्षण लागू होगा।